सुहाग की निशानी हो या औरतों का श्रृंगार, माथे पर बिंदी न सिर्फ खूबसूरती में चार चामद लगाती है बल्कि महिलाओं के लिए सेहत के लिहाज से भी बहुत जरूरी है।
बिंदी को आयुर्वेद से लेकर एक्यूप्रेशर तक में तरजीह दी गई है और इसे महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के उपचार में मददगार भी माना गया है।
मानसिक शांति के लिए
बिंदी लगाने की सही जगह दोनों भौंहों के मध्य का बिंदु है जिसे आयुर्वेद में शरीर का सबसे महत्वपूर्ण चक्र - अजना चक्र कहा गया है। आयुर्वेद में इस चक्र पर हल्के दबाव के जरिए मानसिक शांति और घबराहट के उपचार में मददगार हो सकता है।
सिरदर्द का उपचार
एक्यूप्रेशर विधि से बिंदी के स्थान पर दबाव बनाकर सिरदर्द का उपचार किया जाता है। इस बिंदु से नसें व रक्त कोशिकाएं सक्रिय होती हैं जिससे दर्द से तुरंत राहत मिलती है।
साइनस में आराम
साइनस के मरीजों के लिए भी बिंदी लगाना फायदेमंद है क्योंकि इस प्वाइंट पर दबाव से नाक की नली का सीधा संबंध और इसपर दबाव बनाने से म्यूकस निकलना आसान होता है।
झुर्रियां दूर भगाए
एक्यूप्रेशर विधि में बिंदी के प्वाइंट का महत्व त्वचा को टाइट रखने और झुर्रियां दूर करने के लिए भी माना जाता है। इस पर दबाव से रक्त संचार तेज होता है और त्वचा लंबे समय तक टाइट रहती है जिससे झुर्रियां नहीं पड़ती हैं।
आंखों के लिए फायदेमंद
माथे का मध्य भाग जहां बिंदी लगाते हैं सुप्राट्रोक्लियर नर्व से संबंधित है जिसमें आंखों और त्वचा के लिए जरूरी फाइबर मौजूद हैं। यह आंखो को अलग-अलग दिशाओं में देखने में काफी मददगार है।
सुनने की क्षमता बढ़ाती है
बिंदी लगाने वाले स्थान के पास से कान से संबंधित नस भी गुजरती है जिससे पर दबाव बनाने से सुनने की क्षमता बढ़ती है।
अच्छी नींद के लिए
आयुर्वेद में बिंदी लगाने वाले स्थान को न सिर्फ मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है बल्कि यह तनाव दूर करने और अच्छी नींद के लिए भी जरूरी है। शिरोधरा विधि से इस बिंदु पर दबाव बनाकर अनिद्रा की समस्या दूर की जा सकती है।