रंगोली बनानी हो या तोरण लगाना, या फिर खाने से पहले भोजन का भोग लगाना। ऐसे कई रिवाज हैं जिन्हें आप सालों से अपने घरों में न सिर्फ देखते आ रहे हैं बल्कि अपने जीवन का भी हिस्सा बना चुके हैं।
इन परंपराओं का धर्म या समाज से दीगर भी कुछ महत्व हो सकता है, इस बारे में क्या कभी सोचा है आपने? जानिए पांच ऐसी परंपराओं के बारे में जो सेहत की नजर से भी आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकती हैं।
रंगोली बनाना
रंगोली न सिर्फ आपकी रचनात्मकता को व्यक्त करने का सुंदर माध्यम है बल्कि सेहत के लिहाज से भी इसके कई फायदे हैं।
पुराने समय में इसका इस्तेमाल दमा की मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए भी होता रहा है। इसमें प्रयुक्त होने वाले चावल के बने प्राकृतिक रंग दमा के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, बारांडा या आंगन में रंगोली बनाकर इसे प्राकृतिक तौर पर कीड़े-मकौड़े व कीटाणुओं को रोकने का प्रयास किया जाता था।
चांदी के बर्तन में भोजन
किसी जमाने में मेहमानों के सम्मान में उन्हें चांदी के बर्तनों में भोजन कराते थे। अब ऐसा संभव तो नहीं है लेकिन इसका महत्व आप जरूर जानना चाहेंगे।
चांदी ऐसी धातु है जिसका इस्तेमाल पाश्चयुराइजेशन के लिए किया जाता था यानी इसमें भोजन जल्दी खराब नहीं होता है और लंबे समय तक ताजा रहता है।
कानछेदन संस्कार
लड़कियों के कानछेदन संस्कार का चलन तो आज भी है। आयुर्वेद में कानछेदन या नाक में छेद का संबंध महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने से जोड़कर देखा जाता है। एक्यूप्रेशर में भी इस तकनीक को महिलाओं के लिए फायदेमंद माना गया है।
दरवाजे पर तोरण
तोरण से दरवाजे पर सजावट तो हर शुभ काम में किया जाता है पर इसका एक वैज्ञानिक आधार भी है। नीम और आम के पत्तों के बने तोरण में एंटीबैक्टीरिल गुण होते हैं जो आपके घर को संक्रमण से मुक्त रखने में मददगार है।
भोजन के पहले भोग लगाना
भोजन करने से पहले भगवान का नाम लेना और पानी से थाली के चारों ओर भोग लगाने का प्रचलन पुराने समय से चला आ रहा है।
पहले इस प्रक्रिया से कीड़े मकौड़ों को थाली से दूर रखने में भी आसानी होती थी। इसके अलावा जमीन पर बैठकर इस प्रक्रिया के दौरान शारीरिक मुद्रा से पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है।