नौकरी का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। पिछले कुछ समय से जॉब मार्केट में चल रहा स्लोडाउन खत्म होने वाला है और जल्द आईटी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भरपूर नौकरियां मिलने जा रही हैं।
दिल्ली समेत सभी बड़े शहरों में प्री प्लेसमेंट ऑफर में 40 फीसदी उछाल की तुलना में लेटरल (कोर्स खत्म होने के बाद) प्लेसमेंट ऑफर्स में 62 फीसदी उछाल आया है।
स्लोडाउन के खत्म होने से नौकरियों के अवसर बढेंगे और ये उन सब लोगों के लिए खशखबरी है, जो नौकरी की तलाश में हैं या फिर पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश करने वाले हैं।
मैनेजमेंट की बल्ले-बल्ले
टीमलीज की स्टडी के मुताबिक दो साल से भारतीय जॉब मार्केट में चल रहा स्लोडाउन खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में हायरिंग की डिमांड बढ़ेगी जिसके लिए विदेशी कंपनियां भी अच्छे प्रोस्पेक्टस के साथ भारत की तरफ लौट रही हैं।
दिल्ली में फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (FMS) में भी करीब 57 रिक्रूटमेंट कंपनियों ने स्टेज बुक कराया है। इनमें से 37 कंपनियां पहली बार हुनर तलाशने के लिए बाहर आ रही हैं।
प्री प्लेसमेंट ऑफर की भरमार
फैकल्टी का कहना है कि इंस्टीट्यूट के कुल 205 छात्रों के लिए कैंपस में इस बार 212 प्री-प्लेसमैंट ऑफर आ चुके हैं। इस बार प्री-प्लेसमेंट के तहत छात्रों को 16 लाख से 20 लाख प्रति वर्ष तक के ऑफर मिल रहे हैं।
टीमलीज की स्टडी बता रही है कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी ऑफर 23 फीसदी बढ गए हैं जबकि आईटी सेक्टर के ऑफर्स में 21 फीसदी की वृद्धि आई है।
हायरिंग की डिमांड खासतौर पर आईटी, बीपीओ, हेल्थकेयर, सर्विसेज और एफएमसीजी सेक्टर्स से निकलेगी जबकि इंजिनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर में डाउनटर्न बना रह सकता है।
सरकार पर टिका है दारोमदार
हालांकि नौकरी के क्षेत्र में आई मंदी के लिए पूरी तरह वेश्विक हालातों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। भारतीय कंपनियों के साथ साथ विदेशी कंपनियां भी मान रही है कि केंद्र में स्थायी सरकार बनने से नौकरियों में आई मंदी दूर हो जाएगी।
हेडहंटिंग फर्म आइकेया ह्यूमन कैपिटल सॉल्यूशंस के प्रबंध निदेशक अजीत आइजक भी मानते हैं कि स्लोडाउन से लोग उकता गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल की शुरूआत संतोषजनक रही है। जनवरी में नौकरियों में 20-25 फीसदी बढ़ोतरी हुई है और अप्रैल तक यह 50 फीसदी पहुंच सकती है।
आइजक ने कहा कि अगर केंद्र में स्थिर सरकार बनती है तो इसका निश्चित तौर पर असर पडेगा और मेन्यूफैक्चरिंग के साथ साथ इंजीनियरिंग जैसे ट्रेडिशनल सेक्टर में भी नौकरियों की भरमार होगी।