आने वाले दिनों में आपको मरम्मत हुई सड़क पर चलने के लिए भी टोल भरना पड़ सकता है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों को मरम्मत और रखरखाव के लिए निजी क्षेत्र को सौंपने की नई नीति लागू करने जा रही है। जिसके बदले टोल वसूलने का अधिकार दिया जाएगा। ऑपरेशन, मेंटेनेंस एंड ट्रांसफर (ओएमटी) नाम की इस नीति में योजना आयोग की दखलंदाजी को दरकिनार करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने चार परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, राजमार्गों को ओएमटी के तहत देने की शुरुआत यूपी, मध्य प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के एक-एक हाईवे से की जा रही है। इनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन योजना आयोग के हस्तक्षेप की वजह से मामला अटका हुआ था। सोमवार को इस मुद्दे पर हुई मंत्रालय के आला अधिकारियों की बैठक में योजना आयोग के हस्तक्षेप को नजरअंदाज करते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया।
अभी तक राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत और रखरखाव का काम सरकारी बजट से किया जाता था, लेकिन अब इसे भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के हवाले किया जा रहा है। ओएमटी के तहत चार से नौ साल की अवधि के लिए राजमार्ग निजी क्षेत्र को दिए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे राजमार्गों की मरम्मत और रखरखाव पुख्ता तरीके से होगा और सरकार पर खर्च का बोझ भी नहीं पड़ेगा। इसके लिए वसूले जाने वाला टोल नई बनी सड़कों के मुकाबले कम रहेगा।