सरकार के द्वारा विकास के मद में हो रहे खर्च से प्रति व्यक्ति कर्ज बोझ लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2013-14 में देश में प्रति व्यक्ति कर्ज जहां 41,129 रुपये था वहीं 2014-15 में यह 2,966 रुपये बढ़ कर 44,095 रुपये हो गया है।
सरकार के खातों के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, इस कर्ज बोझ में कई तरह के बाहरी और आंतरिक ऋण और अन्य देनदारियां शामिल हैं।
बेहतर विकास दर हासिल करने के लिए किया गया अधिक खर्च प्रति व्यक्ति कर्ज में हुए इजाफे की प्रमुख वजह है। वर्ल्ड बैंक के इंटरनेशनल डेट स्टेस्टिक्स 2015 के अनुसार, 20 विकासशील देशों की सूची में सबसे ज्यादा कर्ज में डूबने के मामले में भारत चौथे स्थान पर आ गया है।