पाकिस्तान में आतंकी सरगना हाफिज सईद के साथ कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की नापाक जुगलबंदी को लेकर बवाल मच गया है। इस घटना को लेकर पाकिस्तान से लौटते ही मलिक से पूछताछ की जा सकती है। उनका पासपोर्ट भी जब्त किया जा सकता है। साथ ही गृह मंत्रालय ने हुर्रियत और दूसरे अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान जाने देने की रणनीति की समीक्षा भी शुरू कर दी है।
मलिक के भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शुमार आतंकवादी सईद के साथ मंच साझा करने को लेकर यूपीए सरकार घिर गई है। लिहाजा, सरकार ने मलिक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है। बाकी अलगाववादी नेताओं पर भी सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है।
अब तक सरकार कश्मीर में शांति बहाली के प्रयासों के तहत अलगाववादी नेताओं को पाक जाने की इजाजत दे रही थी। मगर सरकार की नरमी का उन्होंने फायदा उठाया। लिहाजा गृह मंत्रालय ने अब भविष्य में अलगाववादी नेताओं को वीजा देने की नीति की समीक्षा करना शुरू कर दिया है।
सूत्रों ने बताया कि मलिक के लौटते ही पाक में उनकी गतिविधियों को लेकर न केवल पूछताछ की जाएगी बल्कि उनका पासपोर्ट भी जब्त किया जा सकता है। विपक्ष ने मलिक को वीजा देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। भाजपा ने मलिक की गिरफ्तारी की मांग की है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि ये आतंकवाद पर सरकार की ढुलमुल नीति का ही नतीजा है कि देश में रहने वाला एक नागरिक देश के सबसे बड़े दुश्मन के साथ भूख हड़ताल कर रहा है।
क्या है मामला
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक ने अफजल गुरू की फांसी के विरोध में इस्लामाबाद में एक दिन की भूख हड़ताल की। जहां मलिक और हाफिज सईद एक मंच पर देखे गए। इस शोकसभा में मलिक ने अफजल की फांसी को भारतीय लोकतंत्र के लिए धब्बा करार दिया।
--मार्च के अंत में एक्सपायर हो जाएगा मलिक का पासपोर्ट, उनका पाकिस्तानी वीजा 26 फरवरी तक वैध
यह गृह मंत्रालय से जुड़ा मामला है। वह इस मामले पर जो भी फैसला करेगा हम उस पर अमल करेंगे।--सलमान खुर्शीद, विदेश मंत्री