भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 1993 में एक साथ 12 स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके की घटना देश में सबसे बड़ा हमला था। पहली बार देश ने सीरियल बम ब्लास्ट के भयानक दंश को झेला था।
इस धमाके का मास्टरमाइंड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम था, जो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की छत्रछाया में कराची में चैन से रह रहा है। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब मेनन ने मुंबई को दहलाने के लिए हवाला के जरिए पैसे जुटाए थे।
गिरफ्तारी से पहले वह सीए फर्म चलाता था और इसके माध्यम से वह अपने बड़े भाई टाईगर मेनन के कालेधन का कारोबार संभालता था।
अब्दुल रज्जाक मेनन उर्फ याकूब मेनन ने मुंबई में बम धमाके की साजिश रची थी। मामले की टाडा कोर्ट में पैरवी करने वाले सरकारी वकील उज्वल निकम बताते हैं कि इस हमले की साजिश दुबई में रची गई थी।
देश छोड़कर भाग गया था याकूब
उसके बाद इसके लिए पैसे जुटाने की जिम्मेदारी याकूब मेनन को सौंपी गई थी।
हवाला के जरिए पैसा इकट्ठा करने के बाद याकूब ने 15 लोगों को पाकिस्तान में
ट्रेनिंग के लिए भेजा था और उनके लिए हवाई जहाज का टिकट भी उपलब्ध कराया
था।
सिलसिलेवार बम धमाके से पहले याकूब देश छोड़कर भाग गया था। ऐसे में
उसके खिलाफ आरोप साबित करना बड़ी चुनौती थी। दो साल बाद 1994 में नेपाल के
काठमांडू से सीबीआई ने उस गिरफ्तार कर लिया था।
टाडा कोर्ट ने 27 जुलाई
2007 को 53 वर्षीय याकूब समेत 11 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए 10 दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद में
बदल दिया था कि इनकी भूमिका याकूब मेनन से अलग थी।
धमाके में 257 लोगों की गई थी जान
हाईकोर्ट और सुप्रीम
कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद याकूब मेनन ने राष्ट्रपति के यहां भी
दया याचिका दायर की थी, जिसे पिछले साल ही खारिज कर दिया गया था। उसके बाद
से याकूब मेनन नागपुर की सेंट्रल जेल में बंद है।
12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिसमें 257 लोगों की जान चली गई थी और 750 लोग जख्मी हो गए थे।
ये धमाके इतने भयावह थे कि पूरा शहर ही दहल गया था। इसी दिन बांबे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की 28 मंजिला इमारत में भी बम धमाका हुआ था, जिसमें 50 लोग मारे गए थे।