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आखिर CBI से याकूब की कौन सी डील हुई थी?

Thu, 30 Jul 2015 03:53 PM IST
सुरेंद्र मिश्र/ अमर उजाला, मुंबई
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आर्थिक राजधानी में सिलसिलेवार बम धमाके से पहले ही मेमन परिवार ने देश छोड़ दिया था। याकूब मेमन सहित पूरा परिवार पहले दुबई गया और उसके बाद पाकिस्तान के कराची में पनाह ले ली थी। लेकिन, याकूब मेमन का मन कराची में नहीं लग रहा था।
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इसलिए वह भारत आने के लिए रास्ता तलाश रहा था। सूत्रों की मानें तो वह मुंबई आने से पहले बड़ी डील करना चाहता था और इसी डील में वह बुरी तरह से फंस गया।

भारतीय खुफिया एजेंसी ने इसका भरपूर फायदा उठाया और उसे नेपाल से दिल्ली लाकर गिरफ्तार कर लिया। हालांकि डील क्या थी और याकूब की क्या शर्तें थीं,  इसके बारे में खुफिया एजेंसियों के अलावा कोई नहीं जानता।

मनगढ़ंत थी थ्योरी?

डील के बारे में सवाल उठना इसलिए लाजिमी है क्योंकि उसके परिवार की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा है कि याकूब मेमन ने आत्मसमर्पण किया था, न कि उसे गिरफ्तार किया गया।

हालांकि तत्कालीन न्यायाधीश पीडी कोडे ने याकूब सहित अन्य 11 दोषियों को फांसी की सजा सुनाते वक्त याकूब के आत्मसमर्पण की थियरी को मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया था।

ऐसे में सवाल यह है कि याकूब खुफिया एजेंसी के जाल में कैसे फंसा। आधिकारिक रिकॉर्ड  के मुताबिक याकूब को पांच अगस्त 1994 को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया।

पैसे के लालच में आया भारत?

उसके कुछ ही दिनों बाद इस धमाके के मुख्य मास्टरमाइंड टाइगर मेमन की पत्नी रूबीना सहित परिवार के  8 अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंबई बम धमाके में 257 लोगों की जान लेने वाला याकूब भारत क्यों आना चाहता था। क्या पैसे के लालच ने उसे भारत खींच लाया। क्या खुफिया एजेंसियों के साथ यही वह बड़ी डील थी, जो नहीं हो पाई।

इन प्रश्नों के जवाब में याकूब का तर्क कोर्ट को गुमराह करने वाला रहा, लेकिन तहकीकात से यह बात सामने आई कि याकूब मुंबई में काली कमाई से बनाई करोड़ों की प्रॉपर्टी के लालच में भारत आया था।

भाई की काली कमाई को लगाता था ठिकाने

चार भाईयों में याकूब मेमन ही ज्यादा पढ़ा-लिखा था। वह चार्टर्ड एकाउंटंट था। याकूब ने सन 1990 में सीए की डिग्री ली और अपने बचपन के दोस्त चैतन्य मेहता के साथ मिलकर मेहता एंड मेमचार भाईयों में याकूब मेमन ही ज्यादा पढ़ा-लिखा था।

वह चार्टर्ड एकाउंटंट था। याकूब ने सन 1990 में सीए की डिग्री ली और अपने बचपन के दोस्त चैतन्य मेहता के साथ मिलकर मेहता एंड मेमन के नाम की फर्म खोली थी।

वहीं, उसके भाई टाइगर मेमन ने स्मगलिंग के जरिये हुई कमाई का काफी हिस्सा मुंबई के रियल इस्टेट में  लगाया था। बताते हैं कि याकूब को ही इस काली कमाई की सारी जानकारी थी। वही अपनी एक्सपोर्ट फर्म तेजारत इंटरनेशनल की मदद से काले पैसे को ठिकाने लगाता था।

कोर्ट ने सील कर दी थी संपत्ति

मुंबई में मेमन परिवार की करोड़ों की नामी-बेनामी संपत्ति थी, जिसमें से अधिकांश मुंबई धमाके के बाद कोर्ट ने सील कर दी थी। मेमन परिवार की यह संपत्ति बहनों और बहुओं के नाम पर भी थी।

हालांकि शायद ही खुफिया एजेंसी ने याकूब के साथ मेमन परिवार की संपत्ति की डील की हो। लेकिन, इस डील के बहाने याकूब गिरफ्त में आ गया, जो बड़ी कामयाबी थी।

न के नाम की फर्म खोली थी। वहीं, उसके भाई टाइगर मेमन ने स्मगलिंग के जरिये हुई कमाई का काफी हिस्सा मुंबई के रियल इस्टेट में  लगाया था।
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याकूब को थी सारी जानकारी

बताते हैं कि याकूब को ही इस काली कमाई की सारी जानकारी थी। वही अपनी एक्सपोर्ट फर्म तेजारत इंटरनेशनल की मदद से काले पैसे को ठिकाने लगाता था।

मुंबई में मेमन परिवार की करोड़ों की नामी-बेनामी संपत्ति थी, जिसमें से अधिकांश मुंबई धमाके के बाद कोर्ट ने सील कर दी थी। मेमन परिवार की यह संपत्ति बहनों और बहुओं के नाम पर भी थी।

हालांकि शायद ही खुफिया एजेंसी ने याकूब के साथ मेमन परिवार की संपत्ति की डील की हो। लेकिन, इस डील के बहाने याकूब गिरफ्त में आ गया, जो बड़ी कामयाबी थी।
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