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'हिंदू राष्ट्र है भारत, हटाए जाएं सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द'

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गणतंत्र दिवस के विज्ञापन पर उठे विवाद के बाद शिवसेना ने संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द को स्थायी रूप से हटाने की मांग की है। शिवसेना की इस मांग के बाद इस विज्ञापन विवाद ने तूल पकड़ लिया है।
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शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि भारत सेकुलर नहीं हिंदू राष्ट्र है, इसलिए संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया जाना चाहिए।

सांसद राउत ने कहा कि यह दोनों शब्द संविधान की प्रस्तावना में कभी नहीं थे। संविधान के पुराने प्रस्तावना को छापना गलती है तो इसे रोज छापा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अनजाने में ही सही लेकिन 26 जनवरी को सूचना प्रसारण मंत्रालय ने जो विज्ञापन जारी किया वह भारत के लोगों की भावना का सम्मान करने वाला है, यदि इन शब्दों को इस बार गलती से हटाया गया है तो अब इसे संविधान की प्रस्तावना से स्थायी तौर पर हटा दिया जाना चाहिए।
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'वाजपेयी को नकारने पर तुले भाजपाई'

क्या है प्रस्तावना का पूरा मामला
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन में संविधान की प्रस्तावना के जो चित्र पेश किए गए थे, वह 42 वें संविधान संशोधन के पहले के थे। उससे पहले संविधान की मूल प्रस्तावना में सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द नहीं थे।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 में 42वें संविधान संशोधन में इस शब्द को प्रस्तावना में जोड़ा था। गणतंत्र दिवस में चूंकि 42वें संशोधन से पूर्व की प्रस्तावना का विज्ञापन जारी किया गया था, इसलिए राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है जिसमें शिवसेना के बयान ने आग में घी का काम किया है।

वाजपेयी को नकारने पर तुले भाजपाई: कुलकर्णी
उधर, भाजपा के  वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी ने ट्वीट कर सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

उन्होंने कहा है कि प्रस्तावना में शामिल यह शब्द संविधान के बुनियादी ढांचे में शुमार है और सरकार उसे हटा नहीं सकती। सन् 1977 के बाद संविधान संशोधन में कई गैर लोकतांत्रिक शब्द हटाए गए थे लेकिन सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द को नहीं हटाया गया। उन्होंने ट्वीट किया है कि कि यह शब्द भाजपा के भी संविधान में है।
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