बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि जो महिलाएं पहले गुस्से में आकर पुरुषों पर रेप का केस दर्ज करा देती हैं और बाद में वापस ले लेती हैं, उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे आरोपों से समाज में गलत संदेश जाता है।
कोर्ट ने बुधवार को रेप और धोखाधडी़ के मामले में आरोपी दिव्येश वाला (35) की अंतरिम जमानत की दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, 42 वर्षीय केंद्रीय एक्साईज इंस्पेक्टर ने दिव्येश पर शादी का झांसा देकर रेप करने का अरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, महिला एक्साइज इंस्पेक्टर और दिव्येश आर्ट ऑफ लिविंग के एक कार्यक्रम में मिले थे। दोनों लगभग एक साल तक रिलेशनशिप में रहे। दिव्येश ने 18 मई को दूसरी महिला से शादी कर ली।
महिला ने 6 जून को थाने में दिव्येश के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। जिसमें उसने बताया था कि दिव्येश ने उससे शादी का वादा किया था इस वजह से दोनों में शारीरिक संबंध बन गए थे।
न्यायमूर्ति साधना जाधव ने दिव्येश को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि रेप का केस करने के बाद महिलाएं या तो उसे वापस ले लेती हैं या फिर आरोपी को छोड़ने की बात कहती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में महिलाएं बेहद गुस्से में होने पर थाने आती हैं। ऐसे में पुलिस असहाय हो जाती है।
सुनवाई के दौरान महिला ने बताया था कि मई 2012 में जब वह आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम में दिव्येश से मिली थी तो काफी प्रभावित हुई थी। फिर दोनों में करीबी बढी़ और शारीरिक संबंध बने।
उसने बताया कि वह हमेशा दिव्येश पर शादी के लिए दबाव बनाती थी लेकिन वह उससे सिर्फ वादा ही करता था। उसने दिव्येश पर एक और महिला से शादी करने के वादे का आरोप लगाया।