क्या मोदी सरकार का महिला सशक्तिकरण महज दिखावा है? अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को एयरफोर्स ऑफिसर पूजा ठाकुर से 'गॉर्ड ऑफ ऑनर' दिलाकर मोदी सरकार ने दुनिया भर को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की थी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सेना की महिला ट़ुकड़ियों ने राजपथ पर परेड किया।
महिलाओं को नेतृत्व सौंपने को फैसला प्रतीकात्मक था, हालांकि आशय दूरगामी और व्यापक। भारत सरकार ने दुनिया भर को दिखाया था कि राजनीति और नौकरशाही में अहम मुकाम बना चुकीं भारतीय महिलाएं सेना में भी बड़े ओहदों पर आ गई हैं। सरकार उनकी काबिलियत पर भरोसा करती है और उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपती है।
लेकिन उसी मोदी सरकार ने बराक ओबामा की घर वापसी के महज दो दिनों बाद विदेश सचिव सुजाता सिंह को रिटायरमेंट के छह महीने पहले ही इस्तीफा दिला दिया वो भी बिना कोई कारण बताए।
सुजाता को हटाकर क्या संदेश दिया मोदी सरकार ने
सुजाता सिंह को छह महीने बाद रिटायर होना था, लेकिन मोदी सरकार ने उनका इस्तीफा ले लिया। सुजाता को हटाने का कारण क्या था, ये सामने नहीं आया। खबर आई कि उन्हें मोदी सरकार ने राज्यपाल या कोई और बड़ा ओहदा दिए जाने का आश्वासन देकर रवाना कर दिया।
सुजाता सिंह की जगह एस जयशंकर को नया विदेश सचिव बनाया गया। सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश नीति के मोर्चे अधिक सक्रिय रहे। उन्होंने विदेश नीति के साथ ही महिला सशक्तिकरण की मुहिम को अधिक बल देने के लिए सुषमा स्वराज को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी।
विदेश सचिव होने के नाते सुजाता सिंह विदेशों में मोदी सरकार की नौकरशाही का चेहरा थी। हालांकि मोदी सरकार ने खुद ही महिला विदेश मंत्री और विदेश सचिव की जोड़ी को खत्म कर दिया।
प्रधानमंत्री ने जसोदाबेन की मनुहार भी नहीं सुनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन अपने हक की लड़ाई पिछले 6 महीने से लड़ रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। न सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप मिलने वाली सुविधाएं दी हैं और न ही आरटीआई के जरिए पूछे गए उनके सवालों का जवाब दिया है।
पिछले हफ्ते बराक ओबामा भारत आए थे, उस समय जोसोदाबेन ने इच्छा जताई थी कि अगर मोदी उन्हें बुलाएं तो वह ओबामा का स्वागत करने के लिए दिल्ली में पहुंच जाएंगी। हालांकि मोदी सरकार की ओर से जसोदाबेन को कोई जवाब नहीं भेजा गया।
जसोदाबेन ने उस समय कहा था, 'अगर वे (मोदी) मुझे आज बुलाएंगे तो मैं कल पहुंच जाऊंगी, लेकिन मैं पहले कभी नहीं जाऊंगी, उन्हें मुझे बुलाना होगा। उन्होंने कहा कि था कि साहेब (मोदी) शायद उन्हें बुलाना नहीं चाहते।
दिल्ली चुनावों में महज आठ महिलाओं को टिकट
लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी देने की नारेबाजी भाजपा समेत सारी पार्टियां कई सालों से कर रही हैं। हालांकि ये नारा हकीकत बनता नहीं दिख रहा है। ऐसे किसी कानून को अमलीजामा पहनाने से पार्टियां तो बचती ही रहीं, महिलाओं को टिकट देने में भी कोताही बरत रही हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने महज आठ महिलाओं को टिकट दिया है। 70 सीटों की विधानसभा के लिहाज से देखें तो ये आंकड़ा 10 फीसदी से भी कम है। दूसरी पार्टियां भाजपा से भी बदतर हालत में हैं। आप ने 6 और कांग्रेस ने 5 महिला उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है।
महिलाओं के अधिकारों, तवज्जो और संरक्षण के लिहाज से देखें तो मोदी सरकार की महिला सशक्तिकरण की नारेबाजी प्रतीकात्मक अधिक नजर आती है। मौजूदा हालात में तब्दीली दूर की कौड़ी लग रही है।