आसाराम पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला रहस्यमय तरीके से पिछले हफ्ते से लापता है। इस महिला के लापता होने की प्राथमिकी सूरत के खेमराज पुलिस थाने में मंगलवार को दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता पुलिस की सुरक्षा में थी, लेकिन उसे सूरत के अमरोली क्षेत्र में एक समारोह में शिरकत करने के लिए छोड़ दिया गया था।
इस महिला के लापता होने से पहले उसकी बहन ने कोर्ट में अर्जी दी थी कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज कराए गए उसकी बड़ी बहन के बयान को बदल दिया जाए। हालांकि इस अर्जी को कोर्ट ने सोमवार को ही खारिज कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत एक बार बयान दर्ज होने के बाद इसे किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जा सकता है।
दोनों बहनों ने लगाया था आरोप
पीड़िता अपनी दो बहनों में सबसे बड़ी है। उसने 6 सितंबर 2013 को आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं के खिलाफ बलात्कार के आरोप में जहांगीरपुरा पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बड़ी बहन ने आसाराम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और उसकी छोटी बहन ने नारायण साईं पर बलात्कार का आरोप लगाया था।
आरोप लगाए जाने से पहले ये दोनों बहने आसाराम और नारायण साईं की शिष्याएं थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 14 दिसंबर को बड़ी बहन ने चार कांस्टेबलों से कहा था कि वो उसे छोड़ दें क्योंकि उसे अपने पति के साथ अमरोली में एक समारोह में जाना है। उसने उनसे यह भी कहा था कि वो 17 दिसंबर को वापस आ जाएगी।
पुलिस ने अपने स्तर पर ही दे दी थी छूट
पुलिस ने बिना अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लिए ही अपने स्तर पर पीड़िता को बाहर जाने की छूट दे दी थी। जब पीड़िता का परिवार 17 दिसंबर तक नहीं लौटा तो उन कांस्टेबलों ने पीड़िता के मोबाइल पर फोन लगाया, लेकिन उनका फोन स्विच्ड ऑफ था।
इसके बाद इन्होंने अपने उच्च अधिकारियों से संपर्क किया जिस बाद सर्च आपरेशन शुरू कर उनके लापता होनी की रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस इंस्पेक्टर एल डी वाघेडिया ने बताया कि खेमराज पुलिस थाने में रहने के दौरान पीड़िता बार बार सुरक्षा लेने से इनकार किया करती थी, लेकिन उसको सुरक्षा देना हमारा कर्तव्य था।