नौसेना ने एक महिला अफसर की यौन प्रताड़ना की शिकायत पर आरोपी का कोर्ट मार्शल किया है और उसकी वरिष्ठता 18 महीने घटा दी है। नौसेना के सूत्रों के मुताबिक आरोपी कमांडर रैंक का अफसर है।
वह विशाखापट्टनम में नौसेना के शिपराइट स्कूल में तैनात था। सब-लेफिटनेंट रैंक की महिला अफसर भी इसमें तैनात थी। इस महिला ने पुरुष अफसर पर कोर्ट मार्शल के दौरान पांच आरोप लगाए थे।
इनमें शारीरिक, मौखिक और यौन प्रताड़ना के आरोप शामिल थे। लेकिन कोर्ट मार्शल में आरोपी अफसर को सिर्फ यौन प्रताड़ना का दोषी पाया गया और इसके लिए उसे 18 महीने जूनियर बना दिया गया।
यह कोर्ट मार्शल कमोडोर स्तर के अफसर के नेतृत्व में किया गया। पिछले महीने आयोजित इस कोर्ट मार्शल में आरोपी अफसर को दोषी पाया गया और कहा गया कि ऐसा आचरण अफसर के चरित्र के मुताबिक नहीं है।
इस कोर्ट मार्शल के तहत आरोप लगाने के दौरान पीड़ित महिला और एक सिविलयन डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत दो महिला अफसर गवाह के तौर पर शामिल हुईं। जिस महिला अफसर ने आरोप लगाया था वह शॉर्ट सर्विस कमीशन अफसर थी।
उसने शिकायत के बाद तीन साल में ही नौसेना छोड़ दी, जबकि इसके तहत सात साल की सेवा अनिवार्य है। नौसेना ने अब इस महिला अफसर से उसके अध्ययन पर किया गया खर्चा वापस मांगा है।
नौसेना की ओर से उसे आईआईटी समेत कई शैक्षणिक संस्थानों में भेजा गया था ताकि वह आर्किटेक्ट बन सके।