विज्ञान के चमत्कार की बदौलत स्वीडन की एक महिला मां बनी है। कुदरत ने इस महिला को दुनिया में बिना गर्भाशय ही भेजने की भूल की थी लेकिन विज्ञान ने ऐसा चमत्कार किया कि कुदरत की भूल भी सुधर गई।
मां बनने वाली महिला डाउन सिंड्रोम की वजह से बिना गर्भाशय के ही पैदा हुई थी। महिला की मां बनने की इच्छा को देखते हुए 65 वर्षीय एक दूसरी महिला ने अपना गर्भाशय दान किया जिसे डॉक्टरों ने महिला के शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया।
डॉक्टरों की कामयाबी से आज वह महिला एक स्वस्थ बच्चे की मां है जो दुनिया में अपनी तरह की पहली घटना है।
डॉक्टरों ने शनिवार को कहा कि 36 साल की इस महिला के मां बनने की घटना विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि है। यह उन करोड़ों महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है जो मां बनने का सुख नहीं हासिल कर सकतीं।
यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग के अस्पताल में पिछले माह महिला ने बच्चे को जन्म दिय। अस्पताल की डॉक्टर लिजा जोहांसन ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह एक असाधारण उपलब्धि है।