सुप्रीम कोर्ट ने शराब के नशे में दुष्कर्म और हत्या के दोषी की हाईकोर्ट से मिली मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। दोषी ने एक गर्भवती महिला के साथ दुष्कर्म किया और बचाने आई उसकी सास की चाकू से गोदकर हत्या की थी। सर्वोच्च अदालत ने इस दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए कहा है कि अपराध के दौरान वह शराब के नशे में था। उसे किए जा रहे कृत्य का अंदाजा ही नहीं था।
सर्वोच्च अदालत ने फैसले में कहा कि इस तरह की विकृत क्रूरता का अपराध दोषी ने शराब के प्रभाव में किया। उसे इसका अंदाजा ही नहीं था। ट्रायल कोर्ट और बांबे हाईकोर्ट ने पांच माह की गर्भवती महिला के साथ दुष्कर्म और उसकी सास को 21 घाव देकर मारने वाले संदेश को मृत्युदंड दिया था। 10 सितंबर, 2007 को इस घटना को अंजाम देने वाले दोषी ने गर्भवती महिला को भी मारने में कसर नहीं छोड़ी थी। उसके शरीर पर भी 19 घाव थे।
सास की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि मरणासन्न अवस्था में अस्पताल ले जाई गई गर्भवती 18 दिन तक भर्ती रही थी। आरोपी ने घर के कीमती सामान को भी लूट लिया था। हालांकि निचली अदालतों ने यह तथ्य नहीं रखा था कि दोषी बहुत नशे में था। लेकिन शीर्षस्थ अदालत ने इसी आधार पर उसकी सजा को कम कर दिया।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार व जस्टिस मदन बी लोकुर की पीठ ने कहा कि दोषी आसानी से हत्या कर सकता था, लेकिन उसने महिलाओं को 21 और 19 घाव दिए। उसने बड़ी संख्या में चोटें पहुंचाई और मृतका की अंगुलियों को भी काट दिया। ऐसा सिर्फ एक असामान्य व्यक्ति कर सकता है। सामान्य व्यवहार के न होने की वजह से अपराध की संज्ञा पर ध्यान देना जरूरी है। इसलिए अदालत सजा को कम करती है।
पीठ ने कहा कि घटना के समय दोषी की मानसिक हालत से यह साफ होता है कि उसे अपराध का अंदाजा ही नहीं था। हत्या करने का उसका इरादा भी स्पष्ट नहीं होता है।