संसद के शीतकालीन सत्र की औपचारिक बैठक से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती कथित असहिष्णुता पर तीखी सियासी जंग के आसार हैं। दरअसल, संविधान को अपनाए जाने की याद में सत्र के शुरू के दो दिनों में होने वाली विशेष बैठक में दोनों ही पक्षों ने संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के बहाने परस्पर हमले की रणनीति बनाई है।
सरकार और भाजपा जहां कथित तौर पर अंबेडकर को उनके कद के अनुरूप महत्व न मिलने का सवाल उठाएगी, तो विपक्ष संविधान के बहाने देश में बढ़ती असहिष्णुता पर सरकार को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। दरअसल, सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है, क्योंकि इसी दिन संविधान को अपनाया गया था। इस अवसर पर चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, दो दिनों की चर्चा में सभी दलों के नेताओं को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
वहीं लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी असहिष्णुता के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए नोटिस दिया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने हालांकि 30 दिसंबर को संसद के दोनों सदनों में बढ़ती असहिष्णुता पर चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं, मगर परोक्ष रूप से अंबेडकर को याद करने के बहाने सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर विशेष बैठक में ही आमने सामने हाेंगे। वहीं संसद चलाने पर सहमति बनाने को लेकर बुधवार को बैठक बुलाई गई है।