बीजेपी ने साबिर अली की सदस्यता रद्द कर दी है। वो कल ही बीजेपी में शामिल हुए थे। उनके शामिल होने के बाद बीजेपी में बड़ा बवाल खड़ा हो गया था।
बीजेपी का मुस्लिम चेहरा कहे जाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी का इजहार किया था तो कई और भी नेता उनके पक्ष में आ गए थे।
RSS ने भी बीजेपी को साबिर से पीछा छुड़ाने के लिए कह दिया था। अब साबिर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है तो देखना ये होगा कि जेडीयू और बीजेपी से निकाले जाने के बाद साबिर को आसरा कहां मिलेगा?
साबिर अली ने लिखी चिट्ठी
जेडीयू छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए बिहार के मुस्लिम नेता साबिर अली ने एक चिट्ठी लिखी है। बीजेपी अध्यक्ष को लिखी इस चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि उनके बीजेपी में शामिल होने को फिलहाल स्थगित कर दिया जाए।
उन्होंने कहा है कि पहले बीजेपी जांच करा ले कि उनका दामन पाक साफ है या नहीं। बीजेपी तसल्ली होने पर उनको अपने साथ जोड़ ले।
साबिर ने कहा कि अगर उन पर लगे आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे।
मोदी पर पूर्व में दिए अपने बयानों पर साबिर ने कहा कि मैंने वही कहा जो जेडीयू ने मुझसे कहलवाया। मुझे मोदी या बीजेपी दोनों से ही कोई परेशानी नहीं है।
साबिर अली के आते ही हुआ बवाल
जेडीयू के नेता साबिर अली ने बीजेपी का दामन क्या थामा, बवाल हो गया। बीजेपी के कुछ नेताओं ने इसे भगवा दामन पर दाग बता दिया। हाल ये हुआ कि साबिर के मुद्दे पर बीजेपी दो हिस्सों में बंटी नजर आने लगी।
विरोध का झंडा सबसे पहले उठाया मुख्तार अब्बार नकवी ने और अपनी ही पार्टी पर ट्वीट बम फोड़ दिया। इस बम की काट बीजेपी के किसी नेता के पास नहीं थी, रामेश्वर चौरसिया से लेकर बलबीर पुंज तक साबिर के विरोध में उतर आए।
हालांकि नितिन गडकरी ने पार्टी के इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को हराना है तो सभी को साथ लेकर चलना होगा।
बीजेपी के घर में कलह मची और तापमान बढ़ गया, कांग्रेस भी इस बढ़े तापमान पर हाथ सेंकने लगी। कपिल सिब्बल ने कहा कि,"अगर मोदी की लहर है तो फिर ऐसे लोगों का समर्थन क्यों लेना पड़ रहा है।"
नकवी को हटाना पड़ा ट्वीट
बीजेपी के कद्दावर नेता और मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी को साबिर अली का पार्टी से जुड़ना इतना खटका कि उन्होंने सोशल मीडिया पर दिल की बात बयां कर दी।
उन्होंने लिख दिया कि," भटकल के करीबी बीजेपी में आ गए हैं, अब जल्द ही दाऊद भी बीजेपी से जुड़ेगा।"
उनके इस ट्वीट पर बवाल हो गया। पार्टी के लिए मीडिया को जवाब देना मुश्किल हो गया। उनके इस ट्वीट से ये सवाल भी खड़ा हुआ कि क्या पार्टी के भीतर उनकी बात नहीं सुनी गई जो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया?
खैर उन्होंने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया। माना जा रहा है कि पार्टी के कड़े रुख के चलते उनको ऐसा करना पड़ा।
दो हिस्सों में बंटी बीजेपी
साबिर अली के मुद्दे पर बीजेपी दो हिस्सों में बंटी साफ नज़र आ रही थी। नकवी के बाद बलबीर पुंज और रामेश्वर चौरसिया भी साबिर के खिलाफ आ गए।
हालांकि नितिन गडकरी ने ज़रूर कहा कि अगर बीजेपी को हराना है तो सभी तो साथ लेकर चलना होगा लेकिन अब RSS भी इस विवाद में कूदी।
RSS की ओर से राम माधव ने ट्वीट किया है कि साबिर अली का पार्टी में आना असंतोष का कारण बन गया है। पार्टी नेतृत्व को काडर और लोगों के विचार से अवगत करा दिया गया है।