आज सवेरे एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर ने तहलका मचा दिया। उसने खबर दी कि मनमोहन सिंह नए साल में पीएम की कुर्सी छोड़ते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए जगह बनाएंगे।
हालांकि, कांग्रेस इस खबर पर बिफर गई। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे के अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस में नेतृत्व की कमी नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि सही समय पर ही आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान किया जाएगा। ऐसे में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की खबर बेबुनियाद है। मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए कहा कि साल के अंतिम दिनों में मीडिया के पास खबरों की कमी रहती है, ऐसे में वह इन खबरों को चलाता है।
नए साल में हट सकते हैं मनमोहन
टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लोकसभा चुनावों से पहले हालात का जायजा ले रहे हैं। वह पद छोड़ सकते हैं, ताकि चुनावों से पहले राहुल गांधी पीएम बन सके। इसके दो फायदे होंगे। पहला, जनता में संदेश जाएगा और दूसरा राहुल की ताजपोशी से संगठन और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।
हालांकि, दूसरे नेताओं ने चेताया कि अभी इस सिलसिले में आखिरी फैसला नहीं हुआ है और ऊंट किसी करवट बैठेगा, यह केवल वक्त बता सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 3 जनवरी को होने वाले संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले का ऐलान कर सकते हैं।
यह बीते दो साल में लगभग साफ हो गया है कि मनमोहन सिंह को नेता के रूप में इस बार पेश नही किया जाएगा। हालांकि, इस बात को लेकर बहस जारी है कि सिंह के बजाय ऐसे वक्त राहुल को कमान सौंपना कितना सही होगा जब देश भर में कांग्रेस और यूपीए को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल पीएम बने, तो फंस जाएंगे!
जो लोग इस फैसले के खिलाफ हैं कि उनका कहना है कि अंतिम पलों में यह फैसला लेने से काफी नुकसान हो सकता है। इन नेताओं का कहना है कि यूपीए 2 के डूबते सितारों को संभालना के लिए अगर राहुल को पीएम बनाया जाता है, तो यह खतरा बना रहेगा कि डूबता सितारा अपने साथ उन्हें भी न ले डूबे।
इसके अलावा अगर यह फैसला हुआ, तो उन घोटालों का बोझ राहुल गांधी की पीठ पर लद जाएगा, जो यूपीए सरकार की दूसरी पारी में हुए हैं। और जिनसे कमोबेश राहुल गांधी का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं रहा है।
इसके अलावा यह भी साफ है कि विरोधी दल नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार है और वह खुद इस जंग को मोदी बनाम राहुल बनाना चाहता है। ऐसी सूरत में मोदी के सामने राहुल गांधी टिक पाएंगे या नहीं, यह साफ नहीं है। साथ ही तीसरी ताकत के रूप में उभरी आम आदमी पार्टी नई चुनौती पेश कर रही है।
कांग्रेस को उबार भी सकते हैं युवराज!
लेकिन जो धड़ा इस फैसले के पक्ष में बताया जा रहा है, उसके अपने तर्क हैं। इन नेताओं का कहना है कि अगर राहुल को मुश्किल वक्त में आगे बढ़ाया जाता है, तो उनकी छवि ऐसे नेता की बन सकती है, जो कठिन वक्त में भागते या छिपते नहीं, बल्कि सामने आकर चुनौती का सामना करते हैं।
मनमोहन सिंह के पास खोने को कुछ नहीं है। वह बुरे वक्त में सरकार के साथ डटे रहे हैं। वह काफी पहले नैतिकता का तकाजा सामने रखकर जा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय वह काम पूरा कर विदाई ले सकते हैं, जिससे राहुल को उनके तहत कुछ सीखने का मौका मिलेगा।
राहुल को कमान सौंपने का तुरंत फायदा यह होगा कि जो पार्टी इन दिनों निराशा में डूबी है, उसके कार्यकर्ताओं को नया जोश मिल जाएगा। वह राहुल गांधी की अगुवाई में आगामी चुनावों में ज्यादा जोर लगा सकते हैं। कांग्रेस चुनाव हारी, तो भी विपक्ष में बैठने के दौरान राहुल के नाम के आगे 'पूर्व प्रधानमंत्री' लगने से उनका कद बढ़ेगा।
मनमोहन ने साफ किया, अब और नहीं!
अतीत में तीसरी पारी के लिए खुला रुख रखने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी को साफ कर दिया है कि वह आगे इस पद को नहीं संभालना चाहते। सोनिया इसकी इजाजत देती हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
राहुल को शीर्ष पद कब सौंपा जाना है, इसे लेकर पसोपेश की स्थिति भले हो, लेकिन पार्टी इस बात को लेकर एकमत है कि इस बार प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर संशय की कोई स्थिति नहीं होनी चाहिए।
विधानसभा या आम चुनावों में किसी भी पार्टी के लिए नेता या उसका चेहरा कितना जरूरी होता है, यह कांग्रेस अच्छी तरह जानती है। यही वजह है कि जनवरी में कांग्रेस कई बड़े फैसले कर सकती है और उनका ऐलान भी मुमकिन है।
भाजपा को भरोसा, राहुल का कुछ नहीं होगा!
कांग्रेस में भले मनमोहन सिंह और राहुल गांधी को लेकर सोच-विचार कर रही है, लेकिन भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह किसी का भी सामना करने को तैयार है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस अपनी नाकामियों से बचने के लिए सारा ठीकरा मनमोहन के सिर फोड़कर उन्हें बाहर बैठाना चाहती है, लेकिन इससे कुछ होने वाला नहीं है।
नकवी ने कहा कि देश की जनता समझदार है और वह सब जानती है। हालिया वक्त में राहुल गांधी ने जो गुस्से का दिखावा किया है, वह केवल दिखावा भर है और उसमें जरा भी सच्चाई नहीं है।
आम आदमी पार्टी ने भी ठोकी ताल
हाल तक कांग्रेस को केवल भाजपा के बारे में सोचना होता था, लेकिन अब उसका सिरदर्द बढ़ाने के लिए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी तैयार हो गई है। पार्टी अमेठी से कुमार विश्वास को राहुल के खिलाफ उतारने की तैयारी कर रही है।
इस संभावित फैसले पर कुमार विश्वास ने कहा कि अगर यह कदम उठाया जाता है तो कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा, क्योंकि राहुल के कमान संभालने पर कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनावों में न्यूनतम सीटों पर आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राहुल को पीएम बनाना छोड़, उनकी एमपी की कुर्सी बचाने के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि अमेठी फैसला सुना रही है कि अब उन्हें नहीं चुनेगी।