आज मृत्युदंड के खिलाफ विश्व दिवस है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि दुनिया के विभिन्न देशों में लोगों को दी जा रही मौत की सजा बेहद चिंताजनक है। उनका मानना है कि मौत की सजा धार्मिक, कानूनी, अपराध विज्ञान और सामाजिक दृष्टिकोण से ठीक नहीं है। सजा-ए-मौत के खिलाफ विश्व दिवस मनाए जाने की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई। इसका उद्देश्य मौत की सजा के खिलाफ विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों, बार एसोसिएशनों, मजदूर संघों और स्थानीय सरकारों को एकजुट करना है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) व (121 देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने) के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व के करीब 97 देशों ने सभी अपराधों के लिए मौत की सजा को खत्म कर दिया है। समय-समय पर हमारे देश में भी मौत की सजा को खत्म करने का मांग उठती रही है। उल्लेखनीय है कि देश में संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरू, मुंबई हमले के एक मात्र जिंदा पाकिस्तानी हमलावर अजमल आमिर कसाब आदि को मौत की सजा सुनाई गई है।
क्या भारत जैसे अहिंसा समर्थक देश में मौत की सजा को समाप्त कर देना चाहिए? देश मे संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। क्या इस मंदिर पर हमला करने वाले अपराधियों को इस सजा से वंचित कर देना चाहिए? इस बिषय पर आप क्या सोचते हैं?