अगर कोई महिला सिर्फ इसलिए खुदकुशी करती है, क्योंकि उसके पति के विवाहेत्तर संबंध थे, तो इस बिनाह पर पति को क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अगर यह साबित होता है कि पति ने उसे वह गंभीर कदम उठाने पर मजबूर किया है, तो ही उसे अपराधी माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति पी सी घोष ने कहा, "हमारा यह मानना है कि केवल इस आधार पर कि किसी पति के दूसरे महिला से करीबी रिश्ते हैं और वह अपनी शादी संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर रहा, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।"
हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि पत्नी को तंग (आईपीसी की धारा 498ए के तहत) करने का मतलब केवल शारीरिक शोषण नहीं है। मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भी अपराध है।
पीठ ने कहा, "लेकिन यह प्रताड़ना इस स्तर की होनी चाहिए कि पत्नी खुदकुशी करने पर मजबूर हो जाए, तभी पति को दोषी माना जाएगा।"
इस फैसले ने गुजरात के रहने वाले पिनाकिन महापात्रे रावल को राहत दी, जिस पर विवाहेत्तर संबंधों में शामिल होकर अपनी पत्नी से क्रूरता करने का इल्जाम लगा था।
रावल की पत्नी ने टेरेस से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइट नोट में उसने रावल के अपनी एक सहकर्मी के साथ विवाहेत्तर संबंधों का जिक्र किया था।