बांबे हाईकोर्ट ने अदालत में तलाक की कार्यवाही के दौरान पत्नी द्वारा पति के विवाहेत्तर संबंधों के बारे में लगाए गए निराधार आरोपों को क्रूरता करार दिया और इसी आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दे दी।
हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे फैमिली कोर्ट के 11 जुलाई के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया। पुणे फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर दायर पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया था।
फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति की अपील की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीएस पटेल और ओएस ओका की बेंच ने महेश और मोहिनी पैगुडे के बीच तलाक को मंजूरी दे दी।
महेश ने क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की थी। इसमें उसने कहा था कि उसकी पत्नी उस पर विवाहेत्तर संबंधों के बारे में निराधार आरोप लगा रही है।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे निराधार आरोप मानसिक क्रूरता के बराबर हैं। इसलिए हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि याची की पत्नी द्वारा पैराग्राफ 6 में लिखित बयान में लगाए गए निराधार आरोप पति के चरित्र और प्रतिष्ठा पर हमला है और यह मानसिक क्रूरता के बराबर है।