सीमा पर शहीद शेरनगर के हेमराज की पत्नी धर्मवती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुखी हैं। वह तीन बार मिलने का जतन कर चुकी हैं, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी। धर्मवती पीएम मोदी को शहीद हेमराज के शहादत दिवस का न्योता अपने हाथों से देना चाहती थीं, लेकिन उनकी हसरत पूरी नहीं हो सकी। निराश हेमवती कहती हैं कि हमें पीएम मोदी से अब कोई उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन
आठ जनवरी 2013 को शेरनगर के हेमराज का सिर सीमा पर पाक सैनिक काट ले गए थे। उस वक्त वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश तक आए थे। सुषमा स्वराज ने तो यहां तक कह दिया था कि यदि हेमराज का सिर पाक वापस नहीं देता है तो उसके बदले में 10 सिर लाना चाहिए। वर्तमान में सारे देश में अच्छे दिन आएंगे की गूंज है, लेकिन शहीद हेमराज की पत्नी इत्तेफाक नहीं रखती हैं। वह दुखी हैं कि तीन बार की कोशिश के बावजूद मोदी को वह शेरनगर में अपने पति हेमराज के शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आने की नहीं कह सकीं। उनके दफ्तर में निमंत्रण पत्र दे दिया गया।
धर्मवती कहती हैं कि जब मुलाकात तक नहीं हो पा रही है तो ऐसे में उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से शहीद के भाई जय सिंह की मुलाकात जरूर हुई, लेकिन उन्होंने भी आठ जनवरी को शहादत दिवस पर आयोजित प्रतिमा अनावरण में आने का यकीन नहीं दिलाया। जय सिंह कहते हैं कि जवाब गोलमोल था।
विज्ञापन
'खुद के पैसों से बनवाई है प्रतिमा'
शहीद हेमराज की प्रतिमा ठीक नहीं थी इसलिए इस बार उसे बदला जा रहा है। शहीद के भाई जय सिंह कहते हैं कि डेढ़ लाख रुपये खर्च करके जयपुर से प्रतिमा बनवाई है। यही इच्छा थी कि केंद्र सरकार का कोई मंत्री आकर इसका अनावरण करे, लेकिन किसी ने आने का वादा नहीं किया।
जय सिंह ने बताया कि शहादत के वक्त श्रद्धांजलि देने राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज सहित कई नेता आए थे जो आज केंद्र सरकार में अहम विभागों के मंत्री हैं, लेकिन अब प्रतिमा अनावरण के लिए कोई नहीं आया। स्मारक, दो भाइयों की नौकरी, पेट्रोलपंप या गैस एजेंसी जैसे वादे भी अधूरे हैं।
बेटा को फौज में भेजने की तमन्ना शहीद हेमराज की पत्नी की तमन्ना बेटा प्रिंस को फौज में भेजने की है। प्रिंस अभी कक्षा चार में है और पांचवीं के बाद धर्मवती उसे सेना के स्कूल में दाखिला कराना चाहती हैं।
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों...
सरहद पर पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए बीएसएफ जवान देवेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर जब बुधवार को उनके इगलास स्थित पैतृक गांव मुहरैनी पहुंचा तो श्रद्धांजलि देने के लिए बच्चे बुजुर्ग सभी उमड़ पड़े। इस धरती के रग-रग में देशभक्ति बसती है और यही कारण था कि लोग शहीद देवेंद्र के पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए पेड़ पर चढ़ गए। शहीद देवेंद्र का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। माटी का लाल यह संकल्प दिलाते हुए इस दुनिया से रुख्सत हुआ कि यह देश रणबांकुरों का रहा है और हमेशा अपने देश की रक्षा के लिए यहां का नौजवान अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहेगा।
सांबा सेक्टर पर शहीद हुए अलीगढ़ के रणबांकुरे देवेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह करीब नौ बजे बीएसएफ 25वीं बटालियन के एएसआई अमरपाल सिंह के नेतृत्व में गांव लाया गया। यहां मुहरैनी समेत आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोग इकट्ठे हो गए। नम आंखों के बीच देवेंद्र सिंह अमर रहें, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, देवेंद्र तेरा नाम रहेगा’ जैसे नारों से पूरा गांव गूंज उठा। जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं व गणमान्य नागरिकों ने शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के बड़े बेटे अभिषेक ने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। बीएसएफ 25वीं बटालियन के जवानों ने शहीद देवेंद्र को परंपरागत सलामी दी।
रॉकेट लांचर के गोले से शहीद हुए देवेंद्र
शहीद देवेंद्र का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे बीएसएफ 25वीं वाहिनी के एएसआई अमर सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि देवेंद्र सोमवार दोपहर सांबा सेक्टर के लू पोल (इनविजिवल प्वाइंट) एलओसी पर तैनात थे। तभी पाकिस्तान के ओर से छोड़े गए रॉकेट लांचर के गोले से देवेंद्र घायल हो गए। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि सांबा सेक्टर पर जहां भारत की एलओसी है पाकिस्तान उसे आईबी (इंटरनेशनल बाउंड्री) मानता है। इसको लेकर समय-समय पर गोलीबारी होती रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन, पाकिस्तान की मदद कर रहा है। जिसके कारण पाकिस्तान छद्म युद्ध करता रहता है। दो दिन बाद देवेंद्र का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर वह बोले कि मौसम खराब होने के कारण यह देरी हुई।
पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे शहीद देवेंद्र का शव गांव पहुंचने पर जहां एक ओर आंखों में आंसू थे वहीं लोगों के दिल में पाकिस्तान के खिलाफ गुबार भी भरा हुआ था। इसी बीच देवेंद्र की पत्नी रीता ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए तो लोगों का गुबार फूट पड़ा। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। साथ ही भारत माता की जय हो, देवेंद्र सिंह अमर रहे के नारे भी गूंजे। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी की।
अंत्येष्टि स्थल पर देर से पहुंचने पर जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश को ग्रामीणों का कोपभाजन बनना पड़ा। लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, बाद में कुछ प्रबुद्ध लोगों ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझा बुझाया।
अभिषेक प्रकाश एसएसपी जे. रवीन्द्र गौड़ अन्य अधिकारियों के साथ मंगलवार को शहीद के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाने पहुंचे थे। इस मौके पर परिजनों की ओर से गैस ऐजेंसी, शहीद स्मारक द्वार के साथ गांव में विकासकार्य कराने की मांग की गई थी। जिलाधिकारी ने लोगों को आश्वस्त किया था कि जो काम उनके स्तर से संभव होंगे वह पूरा सहयोग करेंगे। गैस एजेंसी व आर्थिक सहायता के लिये शासन को रिपोर्ट भेजेंगे।
बुधवार को अंतिम संस्कार के लिए जाते समय यकायक कुछ लोगों ने जिलाधिकारी के मौके पर आने और संबंधित मांगों की घोषणा करने की बात कही। इसी बीच सपा के जिलाध्यक्ष अशोक यादव व अन्य नेताओं ने लोगों की भावनाओं को समझकर जिलाधिकारी से आने को फोन किया। करीब तीन तीन घंटे तक डीएम के इंतजार को लेकर शव वहां रखा रहा। इस पर लोगों ने रोष जताया और उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। एसओ नीरज शर्मा, कोतवाल कोमल सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर व्यवस्था को संभाला।
बीएसफ ने सौंपा चेक, प्रदेश सरकार भी देगी 20 लाख जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने गांव पहुंचकर शहीद देवेंद्र के परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से शहीद के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। वहीं बीस लाख रुपये का चेक बीएसएफ की ओर से परिजनों को दे दिया गया है।
ठंड के बाद भी नहीं रुकी भीड़ घना कोहरा होने के बावजूद जनसैलाब गांव में उमड़ पड़ा। पेड़ों पर चढ़कर लोगों ने शव के अंतिम दर्शन किए। इस दौरान घर के सामने पशुओं के बांधने के स्थान पर लगीं सीमेंट की चादर भरभरा कर गिर गई, जिसमें कई लोग चुटैल भी हुए। लेकिन शहादत को नमन करने वालों पर कोई असर दिखाई नहीं दिया।
सैनिकों को मिले पेंशन शहीद देवेंद्र सिंह के फूफा नरेन्द्र सिंह का कहना था कि सरकार को सैनिकों की पेंशन बंद नहीं करनी चाहिए। जब देश के सांसद व विधायक को आजीवन पेंशन मिलती है तो देश पर प्राण न्यौछावर करने वालों को क्यों नहीं।