सरकारी कर्मचारियों की पत्नियों को पति के वेतन की जानकारी हासिल करने का पूरा अधिकार है।
आरटीआई एक्ट के स्वत: संज्ञान खुलासे से जुड़े प्रावधान के तहत कर्मचारियों के दफ्तरों की ओर से वेतन से जुड़ी जानकारियों का खुलासा जरूरी है। केंद्रीय सूचना आयोग ने इसे जरूरी करार दिया है।
सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि घर का खर्च चलाने के मकसद से हर पत्नी अपने पति के वेतन से जुड़ी जानकारी ले सकती है। यह उसका अधिकार है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी के वेतन से जुड़ी जानकारी थर्ड पार्टी इनफॉरमेशन नहीं है। आरटीआई एक्ट की धारा 4 (1) (बी) (10) के तहत ऐसी जानकारियों का स्वैच्छिक खुलासा करना होता है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निकायों में काम करने वालों का वेतन जनता की ओर से जमा किए गए टैक्स के पैसे से दिया जाता है। इसलिए आरटीआई एक्ट के तहत इसका खुलासा जरूरी है।
आचार्यलु ने दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय को चेतावनी दी है कि इस तरह की जानकारी देने से इनकार करना गलत है और इसके लिए सजा का प्रावधान है।
उन्होंने यह चेतावनी ज्योति सहरावत नाम की एक महिला के आवेदन के सिलसिले में दी है। सहरावत ने अपने पति की सैलरी स्लिप मांगी थी, जो गृह (सामान्य) विभाग में काम करते हैं।
विभाग ने उन्हें वेतन से जुड़ी जानकारी देने से इसलिए मना कर दिया था। उनके पति ने विभाग को लिखित तौर पर आवेदन दिया था उनके वेतन से जुड़ी जानकारियों का खुलासा न किया जाए।