70 वर्षीय गहवा देवी की चिता उनके पति की चिता के साथ ही मिली है। कहा जाता है कि शनिवार की देर शाम जब उनके पति रामचरित्र मंडल की चिता जल रही थी, तो उन्होंने खुद को जलती चिता को समर्पित कर दिया।
इस सूचना के बाद सहरसा के परमनिया गांव अचानक सुर्खियों में आ गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पति-पत्नी की चिता एक साथ मिली है, लेकिन दोनों की मृत्यु के कारणों की जांच की जा रही है।
परिजनों का कहना है कि वो सधवा ही मरी, उन्होंने विधवा का जीवन नहीं जीया, लेकिन उन्हें सती कहना गलत है और उन्हें ऐसा करने के लिए किसी ने प्रेरित भी नहीं किया है।