नए तेलंगाना राज्य का विरोध करने की कैबिनेट में हुई आखिरी कोशिश के तहत उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं करने पर सवाल उठाए गए।
कैबिनेट में आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्री केएस राव ने यूपी विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद भी देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का बंटवारा नहीं करने पर सवाल उठाते हुए आंध्र प्रदेश को बांटने का विरोध किया।
यूपी का जिक्र आते ही रालोद नेता केंद्र्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने इस लपकते हुए कैबिनेट में उत्तर प्रदेश का बंटवारा करते हुए छोटे राज्यों के गठन की मांग उठा दी।
सूत्रों के अनुसार कैबिनेट की बैठक में तेलंगाना गठन के विरोध में दिए जा रहे तमाम तर्कों को किनारे कर दिया गया तो कपड़ा मंत्री केएस राव ने सवाल उठाया कि केवल आंध्र्र प्रदेश का ही बंटवारा क्यों हो रहा?
इस मामले में उत्तर प्रदेश को क्यों छोड़ा जा रहा है? राव ने कहा कि यूपी के बंटवारे को लेकर तो वहां की विधानसभा बाकायदा प्रस्ताव पारित कर केंद्र को अपनी राय भेज चुकी है।
जबकि आंध्र प्रदेश में बंटवारे का गंभीर विरोध हो रहा है। सूत्रों के अनुसार राव के यह तर्क देते ही अजित सिंह ने यूपी के बंटवारे की बात से सहमति जता दी।
हालांकि उनका कहना था कि यूपी की पिछली मायावती सरकार ने प्रदेश को चार हिस्सा में बांटने का जो प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराया है उसमें काफी खामियां हैं। इन खामियों को दूर कर यूपी का भी बंटवारा किया जाना चाहिए।
राव ने यूपी ही नहीं महाराष्ट्र का विभाजन कर अलग विदर्भ राज्य बनाने की दशकों पुरानी मांग पर आगे नहीं बढ़ने का हवाला देते हुए तेलंगाना के गठन का विरोध किया।
इसमें मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू ने भी उनका पूरा समर्थन किया। राव ने महाराष्ट्र विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने की बात भी कही। सूत्रों के अनुसार राव के तर्कों पर कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि विदर्भ की मांग जरूर लंबे अर्से से हो रही है।
मगर महाराष्ट्र विधानसभा ने विदर्भ को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया है। राव और राजू का यूपी और महाराष्ट्र के बंटवारे का सवाल उठाने का आखिरी तीर भी काम नहीं आया और कैबिनेट ने तेलंगाना के गठन पर मुहर लगा दी।