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जब सजा सुनाते वक्त जज साहब ने सलमान की बखिया उधेड़ी

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साल 2002 के बहुचर्चित हिट एंड रन मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को 13 साल बाद सेशन कोर्ट के कमरा नंबर 52 में बुधवार को दोषी ठहराया गया। 240 पन्नों के अपने फैसले में सत्र न्यायाधीश डी डब्ल्यू देशपांडे ने सलमान के आचरण पर कई सवाल उठाए और तीखी टिप्पणियां कीं। जज ने उन सभी बातों को जिक्र किया, जो बॉलीवुड अभिनेता के खिलाफ गईं।
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जस्टिस देशपांडे ने बचाव पक्ष की दलील खारिज करते हुए कहा कि ‘अगर आरोपी यह कहता है कि उसने एक्सीडेंट नहीं किया है तो उसे लोगों को यह भरोसा दिलाना होता है कि ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में सलमान ने पुलिस के आने का इंतजार नहीं किया। वह घर चले गए और सुबह 10.30 बजे तक खुद छिपे रहे।’

'पुलिस के पास जाकर घटना की सूचना देनी थी'

फैसले में कहा गया है कि ‘अगर मुलजिम सलमान खान ने कुछ गलत नहीं किया था तो उन्हें तुरंत पुलिस के पास जाकर घटना की सूचना देनी थी। यहां इस बात पर भी ध्यान देना भी अहम है कि मुजरिम द्वारा कुछ भी सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। घायलों को कोई मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई। वह पुलिस के साथ घटनास्थल पर भी नहीं गए।’

अदालत ने ‘हादसे से पहले बायां टायर फटने’ के सलमान के बचाव को भी अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ‘यह बात खारिज नहीं की जा सकती कि दो सीढ़ियां चढ़ने के बाद हुई टक्कर के कारण टायर की हवा निकल गई हो। सबूत के दौरान विशेषज्ञ गवाह द्वारा दी गई थ्योरी के मुताबिक, बाएं टायर में कोई पंचर नहीं था, बस उसमें हवा कम थी। अदालत ने कहा कि अगर टायर फटा होता तो गाड़ी बेकरी की दो तीन सीढ़ियों पर नहीं चढ़ी होती।’

सलमान की गाड़ी की गति 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा

कोर्ट ने फैसले में बचाव पक्ष के वकील श्रीकांत शिवाडे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि सीढ़ियों की ऊंचाई काफी कम होने और अभियोजन पक्ष द्वारा बताई गई गति पर गाड़ी का उतनी ऊंचाई तक चढ़ना संभव था।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सलमान की गाड़ी की गति 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। बचाव पक्ष का कहना था कि गाड़ी की स्पीड 55 किलोमीटर प्रति घंटा थी और इस स्पीड में भी कोई गाड़ी टायर फटने के बाद दो सीढ़ियों पर चढ़ सकती है।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना कि अभियोजन पक्ष के गवाह और सलमान के अंगरक्षक रहे रवींद्र पाटिल इस मामले में स्वाभाविक और निष्पक्ष गवाह थे। पुलिस कांस्टेबल रहे पाटिल की 2007 में बीमारी से मौत हो गई थी। पाटिल यह लगातार कहते रहे कि ड्राइवर शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था। उनकी गवाही को कोर्ट ने भी माना।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी एक मशहूर अभिनेता है। उसे अच्छी तरह पता था कि बिना लाइसेंस के गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। उसे इस बात की भी जानकारी थी कि इतनी रात को नशे में गाड़ी चलाना ठीक नहीं है।
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अदालत ने खारिज की दलील

आभा सिंह ने अमर उजाला को बताया कि इस प्रकरण में सुनवाई के दौरान अदालत लगातार संवेदनशील रही। सलमान के वकीलों ने हर तरह की दलील दी, दांव-पेंच चले लेकिन जिरह के दौरान अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें लोगों के मरने की वजह को गाड़ी का क्रेन से गिरना बताया गया था।

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि गाड़ी को जब क्रेन से उठाया जा रहा था तो वह अचानक गिर गई और इसके नीचे आने से लोगों की मौत हो गई। इसी तरह से बचाव पक्ष ने अचानक ड्राइवर अशोक सिंह को पेश कर दिया। जबकि अशोक सिंह का न तो पुलिस की किसी फाइल में नाम है और न ही कभी अदालत में जिक्र में आया।

अशोक अचानक फिल्मी अंदाज में अदालत में आ गए। अदालत को यह दलील भी रास नहीं आई कि अशोक गाड़ी चला रहा था। कमाल खान का गायब रहना भी सलमान के विरुद्ध गया।

कमाल ने बांद्रा पुलिस थाने में बांड भरा था, लेकिन लंदन जाने के बाद वह कभी लौटे ही नहीं। जिस डाक्टर कमलेश शुक्ला ने इलाज किया था, वह दुबई जाकर बस गए। कभी गवाही के लिए नहीं आए। उनके पिता ने भी कह दिया कि उन्हें अपने पुत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सत्र अदालत भी इन सभी स्थितियों को समझ रही थी।
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