आखिर क्या कारण है कि भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी तक को अपने पर्चे में पत्नी का नाम जशोदाबेन लिखना पड़ा? इसके पीछे एक बड़ी वजह है।
दरअसल गुरुवार को मुंबई की उत्तर पश्चिम सीट से शिवसेना के लोकसभा उम्मीदवार गजानन कीर्तिकर विवाद में फंस गए। उन पर दूसरी पत्नी के भी होने का आरोप लगा है।
कीर्तिकर ने चुनाव आयोग को दी अपनी जानकारियों में मेघना कीर्तिकर को पत्नी बताया है। इस सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार प्रदीप टी के इलेक्शन एजेंट महेश मलिक ने आरोप लगाया है कि कीर्तिकर की दूसरी पत्नी विदिशा कीर्तिकर पुणे में रहती हैं।
वहीं, गजानन कीर्तिकर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
दो पत्नियों के विवाद में फंसे गजानन
असल में पिछले कुछ समय से इस चुनाव क्षेत्र में ऐसे पर्चे बांटे जा रहे हैं जिनमें गजानन कीर्तिकर के झूठ को सामने लाने की बात कही जा रही है।
इसमें उनकी दूसरी पत्नी और उनकी संपत्ति का जिक्र है। मीडिया में आई खबरों में यह बात सामने आई कि विदिशा कीर्तिकर नाम की महिला पुणे के कोथुर्ड स्थित बहुमंजिला इमारत श्रीमद रेसीडेंसी की 11वीं मंजिल पर रहती है।
यह इमारत कीर्तिवर्धन इंडिया प्रा. लि. द्वारा बनाई गई है। गजानन और विदिशा इस कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में हैं।
मुश्किल में गजानन कीर्तिकर
बताया जाता है कि पुणे में गजानन और विदिशा कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साथ दिखते रहे हैं। उनकी तस्वीरें भी अखबारों में प्रकाशित हुई हैं।
खबरों के अनुसार कोथुर्ड की वोटर सूची में विदिशा का पूरा नाम विदिशा गजानन कीर्तिकर के रूप में दर्ज है। यह विवाद सामने आने के बाद गजानन मुश्किल में दिख रहे हैं।
हालांकि उन्होंने विदिशा कीर्तिकर नाम की किसी महिला को जानने से इनकार किया है। उनकी सीट पर 24 अप्रैल को वोटिंग होनी है और उनके विरोधियों द्वारा इस मुद्दे को हवा देने से कीर्तिकर परेशानी में पड़ सकते हैं।
और इसलिए लिखना पड़ा मोदी को पत्नी का नाम
मुंबई उत्तर पश्चिम सीट पर कीर्तिकर का मुकाबला कांग्रेस के गुरुदास कामत, मनसे के महेश मांजरेकर और राष्ट्रीय आम पार्टी की राखी सावंत से है।
उल्लेखनीय है कि इस बार चुनाव आयोग प्रत्याशियों द्वारा सारी निजी जानकारी दिए जाने को लेकर बहुत सख्त है और उसके गलत पाए जाने पर प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी करार दिया जा सकता है।
यही कारण है भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी तक को अपने पर्चे में पत्नी का नाम जशोदाबेन लिखना पड़ा।