फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जनता को नहीं मिल रहा सस्ते तेल का फायदा

विज्ञापन
विज्ञापन
कच्चे तेल की कीमतें करीब छह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग ढाई रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। शुक्रवार आधी रात से पेट्रोल 2.42 रुपये और डीजल 2.25 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो गया, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई भारी गिरावट का पूरा फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दिया है।
विज्ञापन


वह एक बार फिर दोनों ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर दो-दो रुपये की बढ़ोतरी कर अपनी जेब भरने में लग गई। अगर कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा उपभोक्ताओं को मिलता तो दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 50 रुपये लीटर के करीब होती।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2014 में जब कच्चे तेल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल थी तो हम दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 72.26 रुपये में और डीजल 55.26 रुपये में खरीदते थे। आज जब कच्चे तेल की कीमत घटकर 45 डॉलर प्रति बैरल रह गई है तब भी पेट्रोल 58.91 रुपये और डीजल 48.26 रुपये प्रति लीटर है।
विज्ञापन

और सस्ता होना चाहिए था पेट्रोल

कच्चे तेल के दामों में कमी का पूरा फायदा यदि जनता को दिया जाता तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कम से कम दस-दस रुपये प्रति लीटर की कमी की गुंजाइश थी।

सिर्फ केंद्र सरकार पेट्रोल पर 7.75 रुपये और डीजल पर 6.50 रुपये से ज्यादा अपनी जेब में डाल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में जुलाई 2014 से ही कमी शुरू हो गई थी।

जून 14 में इंडियन बास्केट क्रूड की औसत कीमत 109.05 डॉलर थी, जो जुलाई में घटकर 106.30 डॉलर और अगस्त 2014 में 101.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी, लेकिन तब तक डीजल-पेट्रोल की खुदरा कीमत में कमी पर किसी का ध्यान नहीं गया।

उल्टे 30 जून को पेट्रोल की कीमत में 1.80 रुपये और डीजल में 0.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद डीजल पर हर महीने 50 पैसे प्रति लीटर की कीमत बढ़ती गई, लेकिन पेट्रोल में 15 अगस्त 2014 को 1.80 रुपये प्रति लीटर और 30 अगस्त 2014 को 1.82 रुपये प्रति लीटर की राहत मिली।
विज्ञापन

सरकार के खेल को यूं समझिए

पिछले साल 31 अक्तूबर को पहली बार पेट्रोल और डीजल के मूल्य में क्रमश: 2.41 एवं 2.25 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई थी, जबकि कच्चे तेल की कीमत घटकर 86 डॉलर पर आ गई थी।

नवंबर से केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क के बहाने झोली भरना शुरू किया। पिछले साल 12 नवंबर को डीजल और पेट्रोल पर प्रति लीटर 1.50 रुपये की ड्यूटी बढ़ी, तो खुदरा कीमतें नहीं घटी।

फिर 2 दिसंबर को पेट्रोल पर 2.25 रुपये और डीजल पर एक रुपया प्रति लीटर ड्यूटी बढ़ी। इस साल दो जनवरी को दोनों ईंधनों पर प्रति लीटर दो-दो रुपये और फिर 16 जनवरी को दो-दो रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

इस तरह से बीते तीन महीने में पेट्रोल पर 7.75 रुपये और डीजल पर 6.50 रुपये की ड्यूटी बढ़ाई जा चुकी है। इसके अलावा पुराना घाटा पाटने के चक्कर में तेल कंपनियों ने भी मार्जिन में बढ़ोतरी की है।


सरकार के खेल को यूं समझिए
दिनांक-------कच्चे तेल की कीमत------------------पेट्रोल-------------डीजल    
जून, 2014-------115 डॉलर प्रति बैरल--------72.26 रुपये लीटर-------55.26 रुपये लीटर
16 जनवरी 2015-------45 डॉलर प्रति बैरल-------58.91 रुपये लीटर-------48.26 रुपये लीटर

इस तरह पिछले आठ माह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत करीब 60 फीसदी कम हुई है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को पेट्रोल के भाव में केवल 18 फीसदी और डीजल के दाम में केवल 12.50 फीसदी की राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय गिरावट के हिसाब से कीमतें घटाई गई होती तो दिल्ली में पेट्रोल करीब 50 रुपये प्रति लीटर होता।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें