फ्रांस की राजधानी पेरिस में पिछले तीन दिनों से कुछ आतंकवादी पैगंबर मोहम्मद के अपमान के नाम पर सारी दुनिया को दहशत में डाले हुए हैं। दरअसल ये हमले मात्र पैगंबर के अपमान की वजह से नहीं बल्कि फ्रांस में लंबे समय से चले आ रहे वर्ग संघर्ष का एक उदाहरण है।
फ्रांस की कट्टर धर्मनिरपेक्षता मुस्लिमों के इस संघर्ष की मुख्य वजह है। इस हमले ने फ्रांस के अपनी मुस्लिम जनसंख्या के साथ रिश्तों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। साथ ही शार्ली एबदो पर हमले के मुख्य आरोपियों के फ्रांसीसी नागरिक ही होने की जानकारी ने मुस्लिम संघर्ष को एक नया मोड़ दे दिया है। इस हमले ने स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की फ्रांसीसी भावना को चोट पहुंचाई है। इन हमलों की न्यूयॉर्क, लंदन और मैड्रिड में हुए हादसों से तुलना होने लगी है।
खासकर फ्रांस के अपने मुस्लिम जनसंख्या के साथ संबंधों को लेकर। फ्रांस की कट्टर धर्मनिरपेक्षता का यहां के मुस्लिम जनजीवन पर काफी असर हुआ है। फ्रांसीसी मुस्लिम यहां के सख्त नियमों को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता में रोड़ा समझते हैं। फ्रांस में 50 लाख से अधिक मुस्लिम आबादी रहती है। पश्चिमी यूरोप में फ्रांस सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला देश है। हालांकि फ्रांसीसी समाज और मुस्लिमों के रिश्ते मधुर नहीं हैं।