सोलर इंपल्स-2 के ‘बनारस कनेक्शन’ के पीछे यूं तो कई कारण हैं लेकिन कई लोग इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देख रहे हैं। यह प्रचारित किया जा रहा है कि पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते इंपल्स-2 यहां आया। हालांकि अभियान दल का कुछ और ही कहना है।
सूर्यदूत (इंपल्स-2) को लेकर अहमदाबाद से बनारस पहुंचे स्विस पायलट आंद्रे बोर्शबर्ग ने कहा कि इस साहसिक अभियान के लिए हमने दुनिया का सबसे सुरक्षित हवाई मार्ग चुना है। अहमदाबाद और बनारस उसी हवाई मार्ग में आते हैं। इस रूट पर हवा का बहाव पश्चिम से पूरब की ओर है।
हवा की रफ्तार से सामंजस्य बिठाने में इस रूट पर दिक्कत कम आती है। यही वजह है कि हमारी टीम ने अपने मिशन के लिए इसी रूट को चुना।
2012 से चल रही थी तैयारी
उधर, स्विस दूतावास के वरिष्ठ सलाहकार (शिक्षा, शोध और अनुसंधान) इंद्रनील घोष ने बताया कि साल 2012 से ही इंपल्स-2 की तैयारी चल रही है। विमान का निर्माण जब अंतिम चरण में था तभी से उसके सफर का रोडमैप तैयार हो रहा था। मौसम, हवा का दबाव, हवाई मार्ग की व्यस्तता और मीडिया माइलेज जैसे तमाम पहलुओं पर मंथन के बाद हमने मिशन का खाका तैयार किया। बताया कि इंपल्स-2 का पूरा सेटअप स्विट्जरलैंड से अबूधाबी (यूएई) लाया गया और यहां से मस्कट (ओमान) के रास्ते हम अहमदाबाद होते हुए बनारस पहुंचे।
वहीं बनारस से म्यांमार के लिए उड़ान भरने से पूर्व इंपल्स-2 पायलट पिकार्ड ने कहा, ‘बनारस एशिया का सबसे व्यस्त हवाई मार्ग होने के बाद भी सबसे सुरक्षित है। प्रोटोटाइप विमान के लिए इस रूट पर हवा का दबाव उतना नहीं जितना दूसरे मार्गों पर है। इतना ही नहीं बनारस दुनिया का बड़ा पर्यटक स्थल भी है। यहां की हरेक गतिविधि पर दुनिया भर के मीडिया की निगाहें रहती हैं।
बकौल पिकार्ड, ‘अभियान को मीडिया माइलेज दिलाना और अपने मिशन को पूरी दुनिया में पहुंचाना भी बनारस आने का हमारा एक मकसद था।’
सोलर एनर्जी की ताकत का अहसास
भारत में स्विट्जरलैंड के राजदूत लीनस वॉन कासलमूर का कहना है कि इंपल्स-2 के जरिये हम भारत से अपने रिश्ते और मजबूत करना चाहते हैं। हम उच्च शिक्षा में भी भारत के साथ संबंध बनाना चाहते हैं। स्विस सरकार चाहती है कि भारत के अधिक से अधिक लोग स्विट्जरलैंड में पढ़ाई करें। वैकल्पिक ऊर्जा (सोलर एनर्जी) के बहुआयामी उपयोग को लेकर हम भारत में 2015-16 में कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करेंगे। भारत की युवा पीढ़ी को हम सोलर एनर्जी की ताकत का अहसास कराएंगे। इस समय दुनिया भर में सौ से अधिक कंपनियां सोलर एनर्जी को और अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
इंपल्स-2 अभियान दल की मीडिया कोऑर्डिनेटर क्लाउडिया ने बताया कि अहमदाबाद से बनारस के लिए उड़ान में दो घंटे की देरी कस्टम और इमिग्रेशन क्लीयरेंस की वजह से हुई। पायलट बरट्रेंड पिकार्ड को इमिग्रेशन (आव्रजन विभाग) से मंजूरी मिलने में देरी हुई। पिकार्ड ही विमान को मस्कट से अहमदाबाद लेकर आए थे। कहा कि हम इसके लिए कि सी को दोषी नहीं ठहरा रहे मगर एयरपोर्ट प्रशासन, दस्तावेज और मुहर की प्रक्रिया की चलते हम दो घंटे देर से उड़े। साफ कहा कि पिकार्ड पांच दिन से पासपोर्ट पर इमिग्रेशन की मुहर के लिए आफिस के चक्कर काट रहे थे और हर बाद काम अगले दिन के लिये टाला जा रहा था।
ये है इंपल्स-2 का ‘इंडिया कनेक्शन’
एबीबी कंपनी की भारतीय यूनिट ने विमान के पुर्जे व पंखों को बनाने में मदद किया है।
विमान का इलेक्ट्रिक चेन आफ कंपोनेंट और सोलर इनवर्टर भारत में तैयार हुआ है।
इस विमान का भारत में दो पड़ाव अहमदबाद और बनारस है।
पायलट बरट्रेंड पिकार्ड भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात से खासे प्रभावित हैं।