ट्विटर और फ़ेसबुक पर कई लोग उन्हें शरारत में 'पप्पू' कहने लगे हैं। राहुल गांधी का इंटरव्यू सोशल मीडिया में बिल्कुल फ्लॉप शो साबित हुआ। 'टाइम्स नाउ' को दिए गए 80 मिनट के इंटरव्यू में अर्णब गोस्वामी ने उनसे कई सवाल किए। इनमें से कई का जवाब राहुल गांधी ने सही तरीक़े से नहीं दिया, या जवाब देने से कतराए।
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अंग्रेजी में एक कहावत है कि जब एक नेता को कुछ नहीं कहना होता है तो उसके लिए उसे हज़ार शब्दों की ज़रूरत पड़ती है, बहुत सारे लोगों को राहुल गांधी का इंटरव्यू कुछ ऐसा ही लगा।
टाइम्स नाउ के इंटरव्यू के बाद उन्होंने ख़ामोशी अख़्तियार कर ली। कई महीनों के बाद उन्होंने एक बार फिर एक इंटरव्यू दिया।
इस बार उनका प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा लेकिन वो कई सवालों का जवाब सीधे तौर पर देने से एक बार फिर कतराए। लगभग हर सवाल के जवाब में उनका तकिया कलाम 'भइया' ज़रूर सुनाई दिया।
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राहुल गांधी के बारे में कई लोग कहते हैं कि उनके इरादे नेक हैं और वे देशहित में सोचते हैं। उनके क़रीबी लोग ये भी कहते हैं कि वो दिल से बोलते हैं। लेकिन कई ऐसे चुभते सवाल हैं और जिनका जवाब देने से वो अकसर कतराते हैं।
कम कीमत पर जमीन बेचकर फायदा नहीं पहुँचाया गया?
नरेंद्र मोदी ने हाल में राहुल को उनके बहनोई राबर्ट वाड्रा के ज़मीन सौदों पर ललकारा। इससे पहले भी लोग उनसे इस सवाल का उत्तर माँग चुके हैं, लेकिन राहुल अब तक इस पर चुप्पी साधे हैं।
राबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी ने नरेंद्र मोदी के इस सवाल पर नाराज़गी ज़रूर जताई लेकिन राहुल ख़ामोश रहे, उन्होंने अडानी समूह को गुजरात में ग़लत ढंग से फ़ायदा पहुँचाए जाने का आरोप लगाकर पलटवार किया।
वाड्रा ने प्रियंका से 1997 में शादी की थी और 2004 तक उनके पास सात करोड़ रुपए थे लेकिन अख़बारों की रिपोर्टों के अनुसार उसी साल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उनकी आमदनी दोगुनी हो गई। अब वाड्रा का कहना है कि वे 71 करोड़ रुपए के मालिक हैं।
प्रधानमंत्री पद का घोषित उम्मीदवार बनने से क्यों कतराते हैं?
यह सवाल राहुल के इंटरव्यू में हमेशा पूछा जाता है कि वो प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं या नहीं। उन्होंने इस सवाल को अपने पहले बड़े इंटरव्यू में यह कहकर टाल दिया कि इसका फ़ैसला कांग्रेस के सांसद करेंगे।
उन्होंने अपने दूसरे बड़े इंटरव्यू में ज़रा और स्पष्ट करके कहा कि वह प्रधानमंत्री पद की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार हैं लेकिन साथ ही ये भी दोहराया कि फ़ैसला कांग्रेस के चुने हुए सांसदों के हाथ में होगा।
हालांकि सभी को मालूम है कि यह फ़ैसला केवल गांधी परिवार करता है मगर वह सीधे तौर पर इसका जवाब देने से शायद इसलिए कतराते हैं क्योंकि ऐसा करने पर नरेंद्र मोदी से उनका सीधा आमना-सामना होगा और शायद पार्टी के सलाहकारों को लगता है कि नरेंद्र मोदी उन पर भारी पड़ेंगे।
कोलगेट से लेकर आदर्श तक इतने सारे घोटालों के आरोप लगे लेकिन क्यों नहीं कुछ कहा, कुछ किया?
राहुल गांधी इन विषयों पर अक्सर चुप्पी साध लेते हैं। उनके एक सलाहकार ने एक बार मुझे बताया कि वह इन कथित घोटालों से परेशान हैं लेकिन उन्होंने खुलकर बोलने की कोशिश नहीं की। दूसरी तरफ़, सरकार की उपलब्धियों पर भी वे पहले ख़ामोश रहते थे लेकिन जब उन्होंने बोलना शुरू किया, तब तक शायद देर हो चुकी थी।
वंशवाद के बारे में क्या राय है?
राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी पर कसे अपने परिवार के शिकंजे पर कोई टिप्पणी नहीं करते। नटवर सिंह ने हाल में मुझसे कहा था कि कांग्रेस का मतलब केवल सोनिया और राहुल हैं।
एक तरफ राहुल पार्टी के अंदर लोकतंत्र लाने की बात करते हैं लेकिन दूसरी तरफ वह भी जानते हैं कि उनका परिवार जो चाहता है पार्टी और उसके नेता उसका पालन करते हैं, और जो ऐसा नहीं करता उसे सियासी कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया जाता है।
क्या है विकास का मॉडल?
नरेंद्र मोदी के विकास के मॉडल की चर्चा, प्रशंसा या आलोचना अक्सर होती है लेकिन राहुल गांधी देश में कैसा विकास चाहते हैं इसे लेकर उन्होंने अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कई परियोजनाओं में यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि स्थानीय जनता उसके ख़िलाफ़ है या फिर उन परियोजनाओं से पर्यावरण को नुक़सान पहुँच सकता है।
इसकी एक मिसाल पॉस्को है, कुछ दिनों पहले उस इलाक़े का दौरा किया जहाँ पॉस्को की परियोजना लगनी है, राहुल गांधी ने इस परियोजना के लिए विस्थापित हो रहे लोगों की बात उठाई थी और पर्यावरण पर भी चिंता जताई थी लेकिन इस बार उन्होंने परियोजना का नाम तक नहीं लिया।
लोग जानना चाहते हैं कि भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और पर्यावरण की गुत्थी सुलझाकर विकास करने का कौन सा फ़ार्मूला उनके पास है।
इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है कि राहुल गांधी की एक कोलंबियाई गर्लफ्रेंड है या थी, लेकिन राजनीतिक हलक़ों में इस पर गपशप होती रहती है।
किसी पत्रकार ने सीधे तौर पर उनसे इस विषय पर सवाल नहीं किया है क्योंकि यह उनका निजी मामला है, हाल ही में जब नरेंद्र मोदी की पत्नी का ज़िक्र आया तो लोगों ने राहुल गांधी के निजी रिश्तों के बारे में फिर से कयास लगाए।
अगर राहुल खुद ही इसका खंडन या पुष्टि करते तो शायद यह उनकी छवि के लिए बेहतर होता।