पिछले दस साल से यूपीए सरकार की अगुवाई कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर उनके विरोधी कमजोर पीएम होने का आरोप लगाते रहे और हालिया किताबों में कई ऐसे खुलासे किए गए, जो सोनिया गांधी की ताकत के आगे पीएम को मजबूर दिखाते हैं।
इन दिनों चुनाव और उससे जुड़ा प्रचार चरम पर है, लेकिन इसके मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहीं नजर नहीं आ रहे। प्रचार का सारा जिम्मा सोनिया, राहुल और प्रियंका ने संभाल रखा है।
लेकिन इसके बावजूद जब मनमोहन सिंह के भाई नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए, तो निश्चित रूप से पार्टी के लिए अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। उसे समझ नहीं आ रहा कि अब बचाव कैसे किया जाए। इस बीच दलजीत सिंह कोहली के भाजपा में शामिल होने की वजह को लेकर हैरतअंगेज खुलासे भी हो रहे हैं।
सवाल खड़े होना लाजिमी है
इस घटनाक्रम से प्रधानमंत्री कार्यालय और उनका परिवार, दोनों सकते में है। जाहिर है, चुनाव के ऐन बीच में प्रधानमंत्री के भाई का कांग्रेस की कट्टर विरोधी पार्टी में शामिल होना उसके लिए परेशानी का सबब बन गया है।
पार्टी के नेताओं को बचाव करना मुश्किल हो रहा है। कोई नेता इसे मामूली सी घटना बनाकर खारिज कर रहा है, तो दूसरा कह रहा है कि इसके पीछे कोई डील है।
दरअसल, दलजीत सिंह पेशे से कारोबारी हैं और इससे पहले उनका किसी तरह का कोई राजनीतिक झुकाव नहीं रहा है। ऐसे में अचानक भाजपा का दामन थामना कुछ सवाल जरूर खड़ा करता है। भाजपा में शामिल होते ही उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमृतसर सीट से चुनाव लड़ रहे अरुण जेटली की तारीफ के पुल बांधे, लेकिन मनमोहन सिंह के खिलाफ एक भी लफ्ज नहीं कहा।
भाजपा के बावजूद मनमोहन की तारीफ
मनमोहन सिंह के भाई का कहना है कि वो चाहते हैं कि मोदी पीएम बनें और जेटली सांसद। भाजपा में शामिल होने के बाद दलजीत सिंह कोहली ने कहा, "मैंने यह फैसला अरुण जेटली के लिए किया है। वो बेहद शरीफ और ईमानदार आदमी हैं। मैं चाहता हूं कि वो अमृतसर से सांसद बनें और सेवा करें।"
जब उनसे इसके कारण पूछे गए, तो उन्होंने कांग्रेस को जरूर खरी-खोटी सुनाई, लेकिन अपने भाई की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, "मेरे भाई डॉक्टर मनमोहन सिंह भी बेहद शरीफ और ईमानदार व्यक्ति हैं। उन्होंने पिछले दस साल से देश की सेवा की है।"
दलजीत ने कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो करना चाहते थे, वो उनकी पार्टी और सहयोगियों की वजह से नहीं हो पाया। मुझे उम्मीद है कि अब मोदी आएंगे, तो उनके बचे काम करेंगे।"
3 करोड़ में डील होने का आरोप
हालांकि, मनमोहन सिंह के एक और रिश्तेदार ने इस पूरे घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। उनके भतीजे मनदीप सिंह ने कहा, "कल चाचाजी ने बीजेपी ज्वॉइन की, उससे सारा परिवार सकते में है। उनकी व्यक्तिगत विचारधारा अचानक बदल गई है।"
उन्होंने कहा, "लेकिन हम डॉक्टर मनमोहन सिंह और उनकी नीतियों के साथ हैं और अमृतसर में कैप्टर अमरिंदर सिंह के साथ खड़े हैं।" इस एक घटना ने परिवार में कलह ला दी है।
इस बीच यह खबर भी आई है कि दलजीत के बड़े भाई सुरजीत सिंह कोहली के बेटे मनदीप ने आरोप भी लगाया है कि यह डील 3 करोड़ रुपए की है। उनका कहना है कि परिवार के दूसरे सदस्यों से भी भाजपा ने संपर्क साधा था।
दिग्गी ने साधा बिकाऊ नेताओं पर निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस घटनाक्रम के पीछे कोई और वजह देख रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, "मोदी और बीजेपी की शॉपिंग लिस्ट में पीएम के रिश्तेदार और नॉन-बीजेपी नेता शामिल हैं। इसके अलावा वो भी हैं, जो बिकाऊ है। क्या भ्रष्टाचार पर इस तरह काबू पाया जाएगा?
नरेंद्र मोदी इस घटना से काफी उत्साहित दिख रहे हैं। उन्होंने रैली में कहा था, "मनमोहन सिंह के भाई भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिससे हम लोगों की ताकत में बहुत बड़ा इजाफा हुआ हैं। मैं भाजपा में उनका तहेदिल से स्वागत करता हूं।"
कांग्रेसी नेता मीम अफजल इस घटना को ज्यादा तरजीह नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा, "उनके भतीजे ने भी कुछ कहा है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए। यह कोई बड़ी बात नहीं है। कई परिवार हैं, जिनके सदस्य दो अलग-अलग दलों में काम कर रहे हैं। यह भाजपा और मीडिया का एक धड़ा है, जो इस घटना को उछालना चाहता है।"
क्या रिश्ता है मनमोहन-दलजीत का?
ऐसी जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके सौतेले भाई दलजीत के बीच लंबे समय से कोई खास बातचीत नहीं थी। दरअसल, मनमोहन सिंह का कोई सगा भाई नहीं है।
मनमोहन और दलजीत के पिता गुरमुख सिंह हैं। मनमोहन की मां अमृत कौर थीं, जिनके निधन के बाद उनके पिता ने कृष्ण कौर से शादी की। कृष्ण कौर से बड़े बेटे सुरजीत सिंह और छोटे बेटे दलजीत सिंह का जन्म हुआ।
जाहिर है, भाजपा इस मामले को भुनाना चाहती है और कांग्रेस इसे दबाना चाहेगी। चुनावी मौसम में आए दिन कुछ न कुछ ऐसा बखेड़ा खड़ा हो रहा है, जिसके जरिए कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर हमले कर सकें।