अंडरवर्ल्ड गैंगेस्टर छोटा राजन का पता लगा पाने में विफल रहने पर बांबे हाईकोर्ट ने मंगलवार को जांच एजेंसियों को आडे़ हाथों लिया है।
हैरानी जताते हुए कोर्ट ने सवाल किया है कि आखिर मीडिया के लोगों को राजन का पता कैसे लग जाता है और वे उसका टेलीफोन से इंटरव्यू कैसे कर लेते हैं।
जस्टिस एससी धर्माधिकारी और गौतम पटेल की खंडपीठ ने पुणे से शिवसेना के पार्षद अजय भोसले की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
याचिका में अजय ने याचिका में 2009 में उन पर फायरिंग करने वाले दो लोगों के खिलाफ एक मामले में बाकायदा जांच करने के लिए पुलिस को निर्देश दिए जाने की मांग की है।
जस्टिस धर्माधिकारी ने कहा, ‘हमें यह विश्वास करना मुश्किल लगता है। निजी लोग राजन से संपर्क साध लेते हैं और उसका इंटरव्यू ले लेते हैं। वह कई चैट शो में हिस्सा लेता है। फिर पुलिस उसका ठिकाना पता लगा पाने में नाकाम कैसे हो जाती है।’
कोर्ट ने मामले की जांच कर रही पुणे सीआईडी से चार हफ्तों के भीतर अतिरिक्त जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद रफीक शेख को गिरफ्तार किया था, जबकि एक और आरोपी राजेश यादव के खिलाफ वारंट जारी किया था, जो इस समय एक अन्य मामले में उत्तर प्रदेश की जेल में बंद है।
दो आरोपी छोटा राजन और विजय शेट्टी को मामले में वांछित घोषित किया गया है।