डेंगू जैसी बीमारी से भारत ही नहीं पूरी दुनिया परेशान है। विश्व में अभी तक कहीं भी इसकी रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो सकी है। दक्षिण-पूर्व एशिया के कुल 12 देश डेंगू की चपेट में हैं। पैन अमेरिका के तीस देशों में भी डेंगू पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से फैला हुआ है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को लोकसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत चर्चा के दौरान दी।
चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि डेंगू व चिकनगुनिया इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में फैला हुआ है। लोग बड़ी संख्या में इस रोग के उचित इलाज के अभाव में मर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इसके लिए ज्यादा प्रयास किए जाने के साथ राज्यों को विशेष आर्थिक मदद दिए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जरूरत हो तो सरकार डेंगू के इलाज के लिए एफडीआई (विदेशी निवेश) भी ला सकती है। सपा सांसद शैलेंद्र कुमार ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल क्षेत्र डेंगू से परेशान है। सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा डेंगू से प्रभावित तथा मरने वालों के बारे में दिए गये आंकड़े को भी गलत बताया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। केंद्र केवल ऐसे मामलों में राज्यों को तकनीकी मदद उपलब्ध करा सकता है। आंकड़े भी राज्यों से ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के वैज्ञानिक इस रोग के निदान के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया में इसका इलाज ही नहीं है तो एफडीआई कहां से लाएंगे।
उन्होंने सदस्यों को बताया कि फ्रांस की एक कंपनी ने डेंगू से बचाव के लिए एक वैक्सीन विकसित की है। इस वैक्सीन का फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया तथा भारत आदि देशों में तीसरे चरण का क्लीनकल परीक्षण चल रहा है। भारत में बंगलूरू, लुधियाना, कोलकाता तथा पुणे में इस वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है। ट्रायल में पास होने के बाद यह वैक्सीन भारत सहित दुनिया के उन सभी देशों में उपलब्ध हो जाएगी जो डेंगू जैसी बीमारी की चपेट में हैं।