बराक ओबामा भारत के गणतंत्र दिवस पर अतिथि बनने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं, वो भी ऐसे मौके पर जब वाशिंगटन को एशिया में मजबूत साथी की पहले से ज्यादा जरूरत है। यह भी संयोग ही है कि रिचर्ड राहुल वर्मा ने कुछ हफ्ते पहले भारत में अपना कार्यभार संभाला है। वे भारतीय मूल के पहले अमेरिका राजदूत हैं।
ओबामा की भारत यात्रा कितनी अहम है यह रिचर्ड वर्मा की ब्रुकिंग्स इंडिया इंस्टीट्यूट में कही बातों से साफ हो जाता है।रिचर्ड वर्मा के माता-पिता 1960 के दशक में अमेरिका में बस गए थे। वर्मा जोर देते हैं कि उनके माता-पिता ने अमेरिका मूल्यों को अपनाया जरूर, लेकिन उन्होंने भारत में अपनी जड़ों को भी बचाए रखा।
समुद्र की सुरक्षा
रिचर्ड वर्मा वाशिंगटन के हितों को पहले से ज्यादा फायदेमंद बनाना चाहते हैं और ये कोशिश ओबामा की यात्रा से ही करना चाहते हैं। उन्होंने जोर दिया है कि पूर्वी एशिया में समुद्री परिवहन के रास्तों को खुला रखने और समुद्र की सुरक्षा को मजबूत करने में दोनों देशों के हित हैं।
दरअसल, अमेरिका का मकसद चीन के प्रभाव को कम करने में भारत का इस्तेमाल करना है। वो भारत और चीन में बढ़ती नज़दीकी को रोकने के लिए दिल्ली का इस्तेमाल जापान की मदद के लिए करना चाहता है। शायद यही वजह थी कि जिस दिन ओबामा ने दावा किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधरने लगी है, उसी दिन उनके दूत वर्मा ने भारत में दोतरफा व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया।
व्यापार बढ़ाने पर जोर
रिचर्ड वर्मा का भरोसा है कि अगले पांच साल में भारत-अमेरिका व्यापार पांच गुना बढ़कर 500 अरब डॉलर हो जाएगा। उनकी रणनीति का हिस्सा है कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का इस्तेमाल अमेरिका के लिए करना। ओबामा और नरेंद्र मोदी के बीच नागरिक परमाणु समझौते पर भी बात होने की उम्मीद है।
वर्मा के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि भारत में 2019 तक सबको चौबीसों घंटे बिजली मिले। दूसरी बात, वर्ष 2005 के स्तर के मुकाबले साल 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में 25 फीसदी की कमी हो।
पिछले दिनों पेरू की राजधानी लीमा में हुए पर्यावरण सम्मलेन में अमेरिका ने कार्बन उत्सर्जन में कटौती का लक्ष्य तय करने से साफ इनकार कर दिया था। उसने कम कार्बन उत्सर्जित करने वाली साफ प्रौद्योगिकी दूसरे देशों को देने में भी आनाकानी की थी।
दवा उद्योग को चाहिए राहत
अमेरिका दवा उद्योग से जुड़े पेटेंट अधिकार के मामलों में भी दोनों देशों के बीच दूरी अब तक बनी हुई है। अमेरिका दौरे में मोदी ने भी वहां के दवा उद्योग की बड़ी हस्तियों से हुई बैठक में इस पर विचार करने का भरोसा दिया था।
अमेरिका चाहता है कि भारत उसके दवा उद्योग को छूट देने का फैसला जल्द करे। इसके लिए अमेरिका खाद्य व दवा प्राधिकार के भारत स्थित दफ्तर का विस्तार किया जा रहा है।
रिचर्ड वर्मा जोर देते हैं कि अमेरिका से सैन्य साजो-सामान खरीदना दोनों देशों के हित में है। पर वे इस बात पर कुछ नहीं कहते हैं कि इस क्षेत्र में अमेरिका कंपनियां भारत में पूंजी निवेश और यहां उत्पादन क्यों नहीं कर सकतीं।
जाहिर है, इस मामले मे अमेरिका रूख में कोई बदलाव नहीं है। ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी की गिरती साख को बचाने के लिए अगले दो साल में अमेरिका में जो स्थिति सुधारना चाहते हैं, शायद भारत यात्रा उस दिशा में एक कोशिश हो।