छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले की जीरम घाटी के क़रीब हुए नक्सली हमले में घायल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल का निधन हो गया है।
आइए जानते है इमरजेंसी के दौर में सबसे ताकतवर नेता के रूप में उभरे विद्याचरण शुक्ल के बारे में।
विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में वे बहुत चर्चित हुए थे।
मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के बेटे विद्याचरण शुक्ल ने कई बार केंद्रीय मंत्री की भूमिका निभाई।
वे 1957 से 1962 के बीच तीसरी लोकसभा में पहली बार लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद वे चौथी, पाचवीं, सातवीं, आठवीं, नौवी, दसवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
1929 में जन्में विद्याचरण शुक्ल 1966-67 से लेकर 1996 तक कई बार विभिन्न विभागों के केंद्रीय मंत्री रहे।
वे नरसिंह राव सरकार के बाद कई बार गैर-कांग्रेसी पार्टियों में गए जिसमें चन्द्रशेखर की समाजवादी जनता पार्टी और भाजपा शामिल है। इसके बाद वे कांग्रेस में लौट आए।
सोनिया गांधी से उनके ताल्लुकात कभी मधुर नहीं रहे क्योंकि राजनीतिक हलकों में ये चर्चा रही कि वे किसी समय राजीव गांधी को हटाकर खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।
उनके भाई श्यामाचरण शुक्ल तीन बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ तो विद्याचरण शुक्ल नए राज्य के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक थे।
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिंह राव के दौर में विद्याचरण शुक्ल से ज्यादा ताकतवर राजनेता कांग्रेस में शायद ही कोई रहा हो।