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जब संजय दत्त ने कैदियों की वर्दी पहनने से कर दिया था इंकार

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मुंबई हमलों के दौरान अवैध हथियार रखने के मामले में पांच साल की सजा काटकर संजय दत्त गुरुवार को जेल से रिहा हो गए। हालांकि संजय दत्त को उनके अच्छे व्यवहार के कारण सजा की अवधि पूरी होने से 103 दिन पहले ही जेल से रिहाई मिल गई, लेकिन एक वक्त ऐसा भी रहा जब उन्होंने जेल जाने के बाद कैदियों की ड्रेस पहनने से ही इंकार कर दिया।
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द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पुणे की यरवड़ा जेल जाने से पहले वह कुछ दिन के लिए मुंबई की आर्थर रोड जेल में भी रहे थे। यहां रहने के दौरान सभी कैदियों को कैदी वाली पोशाक पहननी होती है। लेकिन संजय दत्त इसके लिए तैयार नहीं थे।

डीआईजी जेल स्वाती साठे ने बताया कि, शुरूआती समय में आर्थर रोड जेल में रहने के दौरान वह कैदियों वाली पोशाक पहनने के लिए तैयार नहीं थे। जब उन्हें सख्त लहजे में ताकीद की गई तब वह तैयार हुए।
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वहीं, पुणे की यरवड़ा जेल में संजय दत्त के डेली रूटीन के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि, उनकी दिनचर्या अन्य कैदियों की तरह ही होती थी। वह सुबह 5.30 बजे उठते थे। इसके बाद सुबह की प्रार्थना, शारीरिक व्यायाम, चाय, नाश्ता आदि से फारिग होने के बाद वह नियमित कामों में लग जाते थे।
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अपनी सेल में रहकर कागजों के थैले बनाते थे संजय दत्त

उन्होंने बताया कि अन्य कैदी तो अपने कामों के लिए बने वर्क शेड में चले जाते थे लेकिन संजय दत्त को जो कागजों के थैले बनाने का कार्य दिया गया था उसे वह अपनी शेड में ही बनाते थे। सुरक्षा कारणों से वह अपनी शेड में ही कार्य करते थे।

अधिकारी ने बताया कि संजय दत्त ने इस दौरान कई मनोरंजक कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने वहां यरवदा जेल के रेडियो वाईसीपी में रेडियो जॉकी की भूमिका निभाई। इस दौरान स्क्रिप्ट लिखने और गाने चुनने का काम भी खुद किया।

दत्त ने यरवादा जेल में 42 महीने का समय काटा। 56 वर्षीय अभिनेता मई 2013 में पांच साल की सजा सुनाए जाने के बाद यरवदा जेल पहुंचे थे। हालांकि इसमें से डेढ़ साल का समय वह ट्रायल के दौरान पूर्व में जेल में काट चुके थे।

जिसके बाद उन्हें मात्र साढ़े तीन साल ही जेल में गुजारने थे। इसमें से भी उनके अच्छे व्यवहार के कारण उन्हें 103 दिन की छूट मिल गई। जिसके बाद वह गुरुवार को जेल से बाहर आ गए।
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