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एएमयू में भाषण के वक्त ही मुफ्ती सईद के घर हुआ था धमाका

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद की मृत्यु की खबर से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गम का माहौल है। गुरुवार को आयोजित एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण कर प्रार्थना की गई। कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने मुफ्ती सईद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
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दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद का एएमयू से गहरा नाता था। उन्होंने एएमयू से अरबिया में एमए एवं कानून की उपाधि प्राप्त की थी। 1957 से 1959 तक वे एएमयू के एसएस हॉल के उस्मानिया हॉस्टल (लोवर) में रहे।

बाद में उनकी बेटी रुबिया सईद ने भी एएमयू में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी, हालांकि उनका चयन नहीं हुआ था। वर्ष 2003 में 17 सितंबर को आयोजित सर सैयद डे समारोह में मुफ्ती सईद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
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सैयत की मजार पर की थी चादरपोशी

उस दिन को याद कर लोग आज भी मुफ्ती के साहस को सलाम करते हैं। एएमयू के सलाहकार पीआरओ आफिस डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि सर सैयद डे समारोह में जिस वक्त मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भाषण दे रहे थे, ठीक उसी वक्त उनके आवास पर धमाका हुआ था।

भाषण के दौरान ही इसकी सूचना उन्हें मिली। हालांकि वे घबराए बिना अलीगढ़ से ही पूरी स्थिति पर नजर रखे रहे। तत्कालीन कुलपति नसीम अहमद के साथ लंच करने के बाद यहां से रवाना हुए।

उन्होंने सर सैयद की मजार पर जाकर चादरपोशी भी की थी। डॉ. अबरार ने बताया कि पिछले वर्ष 18 अक्तूबर 2015 को आयोजित एलुमनाई मीट में भी वे आना चाहते थे।

लेकिन तबियत खराब होने के कारण नहीं आ सके। उन्होंने बताया कि मुफ्ती सईद मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए थे और उसके बाद उन्हें केंद्र में गृह मंत्री बनाया गया था।

डॉ. अबरार को किया था टोपी भेंट

वर्ष 2004 में एएमयू के पीआरओ डॉ. राहत अबरार जम्मू कश्मीर घूमने गए थे। उस समय मुफ्ती मोहम्मद सईद ने ही पहलगाम में उनके रहने एवं अन्य इंतजाम करवाए थे। डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू एवं अलीगढ़ से उनका गहरा नाता था।

काश्मीर यात्रा के दौरान उन्होंने अपने घर पर खाने पर बुलाया था और वापस आते समय टोपी भेंट स्वरूप दी थी। डॉ. अबरार ने बताया कि मुफ्ती सईद ने राजौरी में बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी की स्थापना की।

उसके संस्थापक कुलपति एएमयू से पढ़ाई कर चुके है और आईजी पद से सेवानिवृत्त हुए मसूद ए चौधरी को बनाया। वर्तमान में उस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जावेद मसर्रत हैं। करीब चार महीने पूर्व ही वे एएमयू के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से गए हैं।
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कश्मीरी छात्र दुखी

मुख्यमंत्री के निधन पर एएमयू में पढ़ाई करने वाले जम्मू कश्मीर के छात्र दुखी हैं। डॉ. मंजूर ने बताया कि मुफ्ती साहब पहले मुसलमान थे, जो गृहमंत्री बने।

एमए के छात्र शाहिद ने कहा कि मुफ्ती साहब शेख अब्दुल्ला के बाद कश्मीर के मजबूत नेता थे। वसीम अहमद एवं इरफान ने कहा कि वे मजे हुए राजनीतिज्ञ थे।

जामिया उर्दू में श्रद्धांजलि सभा

जामिया उर्दू में जम्मू एवं काश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के आकस्मिक निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। फरहत अली खान ने कहा कि जम्मू कश्मीर में प्रजातांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने में मुफ्ती सईद का बड़ा योगदान है।

उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता के परिणाम स्वरूप राज्य में गठबंधन सरकार सत्ता में आई। शमन रजा नकवी, डॉ. जसीम मोहम्मद, रिजवान अली खान, मुसाईद किदवई, नासिर, निसार, सैयद श्कील अहमद, इरफान अहमद आदि उपस्थित थे।
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