शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे खराब स्वास्थ्य की वजह से 25 अक्टूबर 2012 को पार्टी की दशहरा रैली में शामिल नहीं हो सके थे। ऐसा पहली बार हुआ था जब शिव सैनिकों के बीच दशहरा पर बाला साहेब नहीं पहुंच सके थे, लेकिन उन्होंने वीडियो के जरिए अपना संदेश उन तक भेजा और बेहद भावुक अपील की थी। अपील में उन्होंने पार्टी सदस्यों से कहा था जिस तरह उन्होंने 46 वर्षों तक उनकी देखभाल की है। उसी तरह उनके बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे तथा पोते आदित्य का भी ध्यान रखें।
ठाकरे ने बांद्रा स्थित अपने आवास से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए कहा था कि शिवाजी पार्क में 47वीं वार्षिक दशहरा रैली को वह निजी रूप से संबोधित करना चाहते थे, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वो वहां नहीं जा सके है। माना जा रहा है कि बाल ठाकरे ने अघोषित रूप से संन्यास की घोषणा कर दी है।
गांधी परिवार की तरह अपने बच्चों को थोपा नहीं
उन्होंने शिव सैनिकों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा था, ‘गांधी और पवार परिवार सहित अन्य राजनीतिक नेताओं की तरह मैंने कभी भी आप सब पर भाई भतीजावाद थोपने की कोशिश नहीं की। शिव सैनिकों ने उद्धव और आदित्य को स्वयं चुना है, अगर आपको लगता है कि मैं जबरदस्ती कर रहा हूं तो भूल जाइए, लेकिन अगर आपको ऐसा नहीं लगता तो उन दोनों का आगे ध्यान रखना।’
मैं आपको अब और आगे नहीं ले जा सकता ...
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को दिए संदेश में साफ कहा कि वो उन्हें अब और आगे नहीं ले जा सकते हैं, इसलिए अब कार्यकर्ता पूरी तरह उनके बेटे उद्धव और आदित्य पर निर्भर रहें। उन्होंने संदेश में कहा, मैं 86 साल का हो गया हूं। मैं 47 साल शिव सेना के प्रमुख की कमान संभाल रहा हूं, लेकिन अब और आगे नहीं ले जा सकता।’
दिया था शिवसेना और मनसे विलय का संकेत
अपने भावुक संदेश में शिव सुप्रीमो ने कहा था कि सेना के रास्ते में कोई किसी ‘मराठी मानुष’ को नहीं आ चाहिए। दादर के जिस शिवजी पार्क में शिव सेना का गठन हुआ था, उसी जगह पर सेना दो टुकड़ों में बंट गई। ऐसा नहीं होना चाहिए था। अगर हम एक हो जाएं तो कांग्रेस-एनसीपी को हरा सकते हैं।
प्यारे सैनिकों अब मैं ज्यादा नहीं बोल सकता...
बेहद भावुक संदेश में बाल ठाकरे ने कहा था, ‘मेरे प्यारे सैनिकों अब वो टाइम नहीं रहा जब मैं एक दिन में तीन संभाओं को संबोधित करता था। अब थक गया हूं। मेरा शरीर कमजोर हो गया है बिल्कुल टूट गया है। अब उम्र हो गई है और मैं आराम करना चाहता हूं...चिंतन करना चाहता हूं।’