यौन शोषण के आरोपों से घिरे आसाराम बापू जब से पुलिस के हत्थे चढ़े हैं, उनके बारे में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं और इनमें से कई खुलासे हैरानी पैदा करने वाले हैं।
आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि आध्यात्मिक गुरु बनने से पहले वह जिंदगी बसर करने के लिए अजमेर में तांगा चलाया करते थे। उन्होंने यह काम करीब दो साल तक किया।
टीओआई के मुताबिक नौजवान आसुमल के रूप में वह रेलवे स्टेशन से लोगों को अपने तांगे में अजमेर शरीफ दरगाह ले जाया करते थे।
'महिलाओं से अकेले में मिलते थे आसाराम'
विभाजन के बाद आसुमल के पिता ताऊमल हरपलानी पाकिस्तान के सिंध से गुजरात आकर बस गए थे। आसुमल की उम्र सात साल थी और उनका परिवार बेहद गरीब था।
ताऊमल ने गुजरात के कई शहरों में अलग-अलग काम किए और आखिरकार 1963 में अजमेर जाकर बस गए, जहां उनके एक रिश्तेदार ने बुलाया था।
तस्वीरों में देखें: जेल जाकर अपवित्र हो गए आसाराम
आसुमल खरीकुई में अपने अंकल के साथ रहते थे। पेशे से एडवोकेट चरण जीत सिंह ओबराय ने बताया, "वह खरीकुई चौक पर तांगेवालों के साथ बैठा करता था और कोने पर बनाई गई दुकान पर उनके बाल भी काटा करता था। उसके पास एक तांगा था और हम उसे रोज देखा करते थे।"
82 वर्षीय गुल बादशाह भी पहले वहां तांगा चलाया करते थे। उन्होंने बताया, "वह दिग्गी चौक तांगा स्टैंड आता था। मैंने उसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था।"