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ये बातें पहली बार होंगी इस लोकसभा चुनाव में

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16वीं लोकसभा के लिए तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। चुनाव आयोग की तैयारियों और राजनीतिक दलों के तौर-तरीकों के आइने में देखें तो ये चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक हैं।
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देश के इतिहास में पहली बार लोकसभा चुनाव 9 चरणों में कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में 6 चरणों में चुनाव होंगे।

मतदाताओं की संख्या के लिहाज से ये अब तक सबसे बड़ा चुनाव है। आगामी चुनावों में लगभग 81.4 करोड़ मतदाता भाग लेंगे। 

चुनाव प्रचार के तरीकों ने भी इन चुनावों को पिछले चुनावों से अलग बना दिया है। पहली बार चुनाव प्रचार के लिए रैलियों, पोस्टरों और रोडशो के इतर फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अब तक का सबसे लंबा चुनाव

16वीं लोकसभा के लिए 9 चरणों में मतदान होगा। देश के इतिहास में ये अब तक की सबसे लंबी चुनावी प्रकिया है।

बुधवार को चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई। ये 72 दिनों तक लागू रहेगी। मतगणना 16 मई को होगी। देश में आचार संहिता का ये सबसे लंबा अंतराल होगा। 15वीं लोकसभा का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो जाएगा।

इससे पहले 2010 में बिहार में 6 चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे। चुनाव प्रकिया लगभग एक महीने तक चली थी, जो उस समय की सबसे लंबी चुनावी प्रकिया थी।

इन लोकसभा चुनावों में भी उत्तर प्रदेश और बिहार में छह चरणों में चुनाव होना है।

दुनिया भर में सबसे ज्यादा वोटर

आगामी लोकसभा चुनावों में लगभग 81.45 करोड़ मतदाता भाग लेंगे। दुनिया भर में ये वोटरों की सबसे बड़ी संख्या है। ये संख्या अमेरिका और यूरोप‌ीय यूनियन के देशों मतदाताओं की कुल संख्या से भी ज्यादा है।

पिछले चुनावों के लिहाज से मतदाताओं की संख्या में इस बार 10 करोड़ की वृ‌द्घि हुई है। देश में 1952 में पहले लोकसभा चुनाव हुए थे। उन चुनावों में मतदाताओं की संख्या में लगभग 17 करोड़ थी।

हालांकि उस जमाने में लगभग 76 फीसदी मतदाताओं ने वोट किए थे। जबकि पिछले चुनावों में लगभग 59 फीसदी वोट ही पड़े थे।

इस बार नोटा और वोटर स्लिप भी

आगामी लोकसभा चुनाव में नोटा और फोटो वोटर स्लिप की सुविधा दी जाएगी।

हाल ही संपन्‍न पांच राज्यों के चुनावों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम NOTA (None of the above) की सुविधा दी गई थी।

ये सुविधा उन मतदाताओं के लिए थी, जो किसी प्रत्याशी को वोट देने के इच्छुक नहीं थे। वोटिंग के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने फोटो वोटर स्लिप की सुविधा दी थी।
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पार्टियों के लिए भी नया है ये चुनाव

राजनीतिक पार्टियां भी ये चुनाव बिलकुल नए ढंग से लड़ रही हैं। पहली बार चुनाव प्रचार में रैलियों, बैनरों, पोस्टरों और रोडशो के इतर फेसबुक,‌ ट्विटर और व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भाजपा और आप जैसी पार्टियों ने सोशल मी‌डिया में प्रचार-प्रसार के लिए वार रुम बना रखे हैं, जिसमें तेज-तर्रार तकनीकविदों की टीम लगातार काम कर रही है।

इन पार्टियों से पिछड़ रही कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया में प्रचार के लिए रणनीति बनाई है। लेकिन अभी कई राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं, जो सोशल मी‌डिया से अछूती ही हैं।
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