कारगिल युद्ध के दौरान हुए घोटाले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी। सवोच्च अदालत ने केंद्र से पूछा कि आखिर हिंदुस्तान में रक्षा की क्या तैयारियां हैं?
रक्षा हथियारों और उपकरणों से जुड़ी छोटी से छोटी सामग्री के लिए हमारा देश विदेशों पर इतना ज्यादा क्यों निर्भर है? इनका निर्माण देश की आयुध कारखानों में क्यों नहीं किया जाता?
इन पहलुओं पर विचार करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कारगिल युद्ध के दौरान रक्षा उपकरणों की खरीद-फरोख्त में कथित घोटाले के मुद्दे पर सरकार से जवाब तलब किया है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कारगिल युद्ध से 40 दिन पहले सरकार ने जरूरी उपकरण व हथियारों की खरीद का आदेश दिया। कैग रिपोर्ट कहती है कि जब विदेशों से सामग्री आई, तो लड़ाई खत्म हो चुकी थी और उसका कोई उपयोग नहीं हुआ।
आखिर देश में रक्षा संबंधी क्या तैयारियां और नीति हैं। जो कंपनी ब्लैक सूची में डाली गई, उसी से बाद में जवानों को मुहैया करायी जाने वाली जैकेट खरीदी गई।
जस्टिस टीएस ठाकुर की पीठ ने केंद्र से विदेशों से मंगाए जाने वाले रक्षा संबंधी उपकरणों, विस्फोटकों और हथियारों की खरीद की नीति तलब की है। साथ ही देश के आयुध कारखानों में बनाई जाने वाली रक्षा संबंधी सामग्री पर भी जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि कैग रिपोर्ट के अनुसार 2163 करोड़ रुपये मूल्य की सप्लाईयों का लगभग 75 प्रतिशत संघर्ष के खत्म होने के बहुत बाद में प्राप्त किया गया।
पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता केजी धनंजय की ओर से पेश हुए अधिवक्ता डीके गर्ग की उस दलील पर दिया, जिसमें कहा गया कि चार-पांच छोटे अधिकारियों को निलंबित किए जाने से इसका हल नहीं निकलेगा।
सरकार को यह बताना चाहिए कि देश में रक्षा संबंधी क्या सामग्रियां बनती हैं। अदालत ने साथ ही ब्लैक लिस्ट में डाली गई कंपनी से जैकेट की खरीद पर सरकार को हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही कैग के बाद आई सीवीसी की रिपोर्ट को भी अदालत में पेश करने का निर्देश दिया गया है।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल मोहन पराशरन से कहा कि कैग रिपोर्ट पढ़ने के बाद यह प्रतीत होता है कि सरकार विदेशों से हथियार और उपकरण रोजमर्रा की जरूरत के मुताबिक मंगाती है।
जवाब में पराशरन ने कहा कि कारगिल युद्ध से 40 दिन पहले उपकरणों की मांग से संबंधित आदेश सरकार ने भेज दिया था। तब पीठ ने रक्षा की तैयारी, नीति और देश में होने वाले निर्माण पर जवाब तलब किया।
सॉलीसीटर के जवाब पर पीठ ने कहा कि देश की आयुध कारखानों में आखिर क्या सामान बन रहा है क्योंकि कारगिल युद्ध के दौरान तो जूते, गोलियां, ताबूत व तमाम अन्य सामान भी विदेश से ही मंगाया गया।
सरकार गोपनीयता की आड़ में छुपाती है घपले
सर्वोच्च अदालत का कड़ा रुख इस मुद्दे पर तब सामने आया, जब अदालत के मित्र (एमाइकस क्यूरे) राकेश द्विवेदी ने कहा कि सरकार रक्षा से संबंधित हर मामले को अति गोपनीय बताती है।
यही वजह है कि खरीद-फरोख्त में घपले हो रहे हैं। मगर सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है, लोग इस बारे में जानना चाहते हैं।