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SC का सवाल, ‘आधार कार्ड’ का क्या है आधार?

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Aadhaar Aadhar Card New - फोटो : istock
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आधार कार्ड एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण के दायरे में आ गया है। आधार योजना के तहत जुटाई जा रही जानकारी की वैधता को लेकर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आखिर मोदी सरकार का आधार कार्ड को लेकर अब क्या पक्ष है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने आधार कार्ड योजना को बेकार बताया था, जबकि सरकार में आने के बाद आधार की तरफदारी की जा रही है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि वह आधार के मसले पर  13 फरवरी तक केंद्र सरकार का पक्ष रखेंगे।
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पीठ आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड के मद्देनजर लोगों से ली गई जानकारियों को नष्ट कर दिया जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया जाना चाहिए।
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जनता के निजता के अधिकार का दुरुपयोग

एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी मैथ्यू जार्ज द्वारा दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है नागरिकों से ली गई जानकारी गुप्त या सुरक्षित रहेगी या नहीं, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता ने नागरिकता अधिनियम के उस प्रावधान को भी चुनौती दी गई है जो केंद्र सरकार को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने का अधिकार देता है।

ऐसा करना मूल अधिकारों का उल्लंघन है। यह नागरिकों के मिले निजता और प्रतिष्ठा केअधिकार के खिलाफ है। इसकेअलावा याचिका में 28 जनवरी 2009 में योजना आयोग द्वारा इस संबंध में जारी अधिसूचना को भी निरस्त करने की गुहार लगाई गई है। कुछ राज्यों में तो वेतन के लिए आधार कार्ड को जरूरी बना दिया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम ने पीठ के समक्ष कहा कि नागरिकों के निजता के अधिकार की रक्षा करना राज्य का दायित्व है लेकिन इस मामले में नागरिकों की जानकारी तीसरी एजेंसी से जुटाई जा रही है, जो सुरक्षित नहीं है। मालूम हो कि आधार योजना को चुनौती देने वाली एक याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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