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भाजपा के घोषणापत्र में क्या है खास, जानिए अंदर की बात

Wed, 02 Apr 2014 07:32 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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टिकट बंटवारे से लेकर बुजुर्गों को नजरंदाज करने के घमासान से जूझ रही भाजपा अब चुनावी घोषणापत्र को जारी करने में कोई विघ्न बाधा न आए, इसके लिए कुछ ज्यादा ही सतर्क हो गई है। घोषणापत्र को जारी करने के मौके पर किसे बुलाए और किसे न बुलाए, इसे लेकर पार्टी दुविधा में हैं।
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इसलिए भाजपा अब बृहस्पतिवार को यूपीए सरकार व कांग्रेस के खिलाफ चार्जशीट तो जारी करने की तैयारी में है, लेकिन छह दिन बाद मतदान का पहला चरण निकट देखकर भी घोषणा पत्र जारी करने का मुहूर्त तय नहीं कर पा रही है।

इस घोषणा पत्र को लेकर भाजपा भले ही दुविधा में हो, लेकिन चुनाव में मध्यम वर्ग को लुभाने के लिए बड़े दांव चलने जा रही है।

अटल का अधूरा मिशन, मोदी का विजन

भाजपा के घोषणापत्र में आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से लेकर आर्थिक वादे भी शामिल किए जाएंगे। नौकरीपेशा खासतौर पर मध्यमवर्ग का कुछ ज्यादा ही ख्याल रखा जा रहा है। डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में तैयार चुनाव घोषणा पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अधूरे मिशन को पूरा करने के संकल्प से लेकर पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विजन की छाप दिखेगी।

इसके लिए भाजपा की चुनाव घोषणा पत्र कमेटी ने देशभर से 42 हजार लोगों से सुझाव भी लिए। जबकि समाज के लगभग हर वर्ग के लोगों से मुलाकात कर उनकी राय व सुझाव लिए गए हैं। इसमें सबसे पहले भाजपा आयकर को तर्कसंगत बनाने की बात कही गई है।

देश के बुनियादी ढांचे को विस्तार देने व मजबूत बनाने संबंधी अटल सरकार की बंद पड़ी परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने का वादा भी घोषणा पत्र में है।
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कोई बड़ा नेता नाराज न हो जाए

पार्टी के कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल कहते हैं कि महंगाई रोकना, रोजगार बढ़ाना, बदहाल अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने से लेकर देशी-विदेशी निवेश को बढ़ाना भाजपा की प्राथमिकता रहेगी। इसी से संबंधित मुद्दे घोषणापत्र में होंगे।

इधर, पहले यह घोषणापत्र बृहस्पतिवार को जारी करने की योजना थी, लेकिन पार्टी में यह तय नहीं हो पा रहा है कि किस किस बड़े नेता को बुलाया जाए। मोदी इसे राजनाथ सिंह की मौजूदगी में जारी करेंगे। ऐसे में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की क्या भूमिका रहेगी, पार्टी तय नहीं कर पा रही है।

सबसे ज्यादा मुश्किल आडवाणी को लेकर है। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली व घोषणा पत्र कमेटी के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी तो रहेंगे ही, ऐसे में विजन दस्तावेज बना रहे नितिन गडकरी, पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू जैसे वरिष्ठ नेता में से कोई छूट गया तो उसके नाराज हो जाने का खतरा है।
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