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शिंजो अबे से क्या चाहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे तीन दिन की यात्रा पर शुक्रवार को भारत आ रहे हैं। वह यहां भारत-जापान सम्मेलन में शामिल होने के साथ ही वाराणसी भी जाएंगे। इस दौरान दोनों देश कई अहम समझौते पर दस्तखत भी करेंगे।
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल जापान गए थे। बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडपल्ली से पूछा कि इस बीच दोनों देश कितने करीब आए हैं।

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे तीन दिन की यात्रा पर शुक्रवार को भारत आ रहे हैं। वह यहां भारत-जापान सम्मेलन में शामिल होने के साथ ही वाराणसी भी जाएंगे। इस दौरान दोनों देश कई अहम समझौते पर दस्तखत भी करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल जापान गए थे।
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यहां हैं दोनों एकमत

बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडपल्ली से पूछा कि इस बीच दोनों देश कितने करीब आए हैं। कोंडपल्ली के मुताबिक अब लगने लगा है कि दोनों देशों को आर्क ऑफ फ्रीडम एंड प्रॉस्पेरिटी लागू करने की स्थिति आ गई है।

दोनों देशों में कैसे समझौते हो सकते हैं?इस पर उनका कहना है कि दोनों लोकतंत्र हैं और वैश्विकरण का दोनों का उद्देश्य है।  फिर नौपरिवहन की आजादी और अंतरराष्ट्रीय कानून पर दोनों एकमत हैं। इसके अलावा दोनों देश अहमदाबाद से मुंबई तक आठ अरब डॉलर की एक हाईस्पीड बुलेट ट्रेन का करार करना चाहते हैं।

इसमें पहले 10 साल तक जापान से मिलने वाले ऋण को वापस नहीं करना और कुल 40-50 साल की परियोजना अवधि के दौरान पुनर्भुगतान किया जाना है। इसकी ब्याज दर भी बहुत कम रहेगी। इसलिए इससे भारत को बहुत लाभ होने की उम्मीद है।
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हो सकती है महत्वपूर्ण घोषणा

कोंडपल्ली के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर में एक भाषण में बताया था कि रक्षा उद्योग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर 49% की सीमा हटा ली गई है और अब शायद रक्षा उद्योगों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लागू होगा।

इसका अर्थ यह है कि यूएस-2 एंफीबियस एयरक्राफ्ट के संयुक्त विकास का जिक्र भी शायद संयुक्त बयान में हो।

हालांकि उनका कहना है कि सात-आठ साल पहले भारतीय और जापानी प्रधानमंत्री के संयुक्त बयान में उत्तर-पूर्व से जरिए संपर्क के बारे में जिक्र था, लेकिन उस पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। हो सकता है इस बार इस संबंध में भी महत्वपूर्ण घोषणा हो।
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