कलकत्ता हाईकोर्ट ने इमामों और मुअज्जिम को पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से दिए जाने वाले वेतन पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट में अपने निर्णय में कहा है इमामों और मुअज्जिम को दिया जाने वाला वेतन जनता के हित में नहीं है। साथ ही यह असंवैधानिक है।
पिछले वर्ष 9 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी मस्जिदों के इमामों को 2500 रुपए प्रतिमाह का भुगतान किए जाने का फैसला किया था।
उसी के कुछ दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी मुअज्जिम को भी 1000 रुपए प्रतिमाह का भुगतान किए जाने का फैसला किया था।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।
जस्टिस प्रणब चटर्जी और एम पी श्रीवास्तव ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार का यह फैसला सविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लघंन करता है।
संविधान के अनुसार इमामों और मुअज्जिम के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता है।
किसी धर्म के आधार पर इस तरह की आर्थिक सहायता पूरी तरह से गैरकानूनी है।
कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को 162 करोड़ रुपए का भुगतान करने पर भी पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है। वक्फ बोर्ड जनता के लिए कार्य नहीं करता है। और ऐसे में वक्फ बोर्ड को 162 रुपए का भुगतान करना गैरकानूनी है।