यूपी के प्रमुख शहरों में वाटर टैक्स बढ़ाने की तैयारी है। पहले चरण में सात शहरों आगरा, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी और चित्रकूट में लागत मूल्य के बराबर वाटर टैक्स लिए जाने की योजना है। इसके बाद इसे अन्य शहरों में लागू किया जाएगा। इस संबंध में स्थानीय निकाय निदेशालय ने संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना जिन शहरों में चल रही है, वहां जल संस्थानों को आत्म निर्भर बनाने के लिए लागत मूल्य के बराबर वाटर टैक्स लिया जाना है। यूपी में इसे अभी तक लागू न किए जाने के चलते केंद्र के शहरी एवं विकास मंत्रालय ने जेएनएनयूआरएम का 252 करोड़ रुपये रोक लिया है।
केंद्र ने स्पष्ट कहा है कि पहले लागू मूल्य के बराबर वाटर टैक्स लिया जाए, इसके बाद रुका पैसा दिया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय टीम भी यूपी के तीन दिवसीय दौरे पर आई थी। उसने भी सुझाव दिया है कि जल मूल्य की लागत के आधार पर वाटर टैक्स की वसूली की जाए।
स्थानीय निकाय निदेशालय के प्रस्ताव में कहा गया है कि लखनऊ में 6.50 रुपये प्रति किलो लीटर (एक हजार लीटर) उत्पादन का खर्च आ रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं से 2.45 रुपये प्रति किलो लीटर के हिसाब से लिया जा रहा है। कानपुर में 8.70 रुपये आ रहा है और लिया जा रहा है 4.25 रुपये। आगरा 11.5 रुपये के स्थान पर 3 रुपये, इलाहाबाद में 10 रुपये के स्थान पर 3.24 रुपये, वाराणसी 7 रुपये के स्थान पर 3.15 रुपये, झांसी में 14 रुपये के स्थान पर 6.60 रुपये और चित्रकूट में 13.10 रुपये के स्थान पर 7.30 रुपये लिया जा रहा है। स्थानीय निकाय निदेशालय ने इसके आधार पर वाटर टैक्स लिए जाने का प्रस्ताव भेजा है।