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धरना देने के लिए बुला रही दिल्ली पुलिस

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धरने-प्रदर्शनों के लिए दिल्ली पुलिस आपका स्वागत कर रही है। 5,000 व्यक्तियों तक जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन का अयोजन कर सकते हैं। 50,000 व्यक्ति हों तो धरना प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान जाएं।
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दरअसल ये मजमून दिल्ली पुलिस के उस विज्ञापन का है, जो आज कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों में छपा है। प्रदर्शन पर लाठी चार्ज करने और पानी की बौछारें बरसाने लिए बदनाम दिल्ली पुलिस ने पहली बार धरने प्रदर्शनों के लिए संपर्क करने का आग्रह किया है। और विज्ञापनों में पुलिस उपायुक्त का नंबर भी दिया है।

हालांकि माना ये जा रहा है कि विज्ञापन के जरिए पुलिस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। गणतंत्र दिवस से चंद दिनों पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मनाही के बाद भी रेलवे भवन पर धरना
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दिया था। मुख्यमंत्री को धरना देने की इजाजत देने के कारण हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार भी लगाई।

सड़क पर हो रहे प्रदर्शन से चिंत‌ित है पुलिस

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ये विज्ञापन राजधानी में धरनों की बढ़ती संख्या के कारण दिया गया है। विज्ञापन में ये साफ किया गया है कि जंतर-मंतर पर 5,000 से अधिक लोग धरना नहीं दे सकते। प्रदर्शनकारियों की संख्या ज्यादा हो तो वे रामलीला मैदान जाएं। लेकिन ये संख्या भी 50,000 से ज्यादा न हो।

धरने प्रदर्शन के लिए संपर्क करने के लिए मध्य जिला, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त का फोन नंबर दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि राजधानी में धरने प्रदर्शन की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पुलिस केवल कुछ लोगों को ही प्रदर्शन की अनुमति दे सकती है। जिन्हें प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है, वे सड़कों पर प्रदर्शन करते हैं, जिससे कानून व्यवस्‍था की स्थित बिगड़ जाती है।
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विज्ञापन के मकसद पर बोली दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राजधानी में होने वाले अधिकांश प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों की संख्या 5,000 से ज्यादा होती है। पुलिस जब उन्हें रामलीला मैदान जाने को कहती है तो वे विरोध करना शुरू कर देते हैं। वे ऐसा दिखाते है मानों हम उनके मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे हों।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत का कहना है क‌ि विज्ञापन का मकसद लोगों को ये बताना है कि हम प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं है। लेकिन प्रदर्शनों में लोगों को होने वाली दिक्कतों का ध्यान रखा जाए।
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