टीवी इंटरव्यू में राहुल गांधी ने 84 के दंगों का जिक्र क्या छेड़ा पूरी कांग्रेस के लिए अब इस मुद्दे पर जवाब देना भारी पड़ गया है।
एक तरफ अकाली दल और भाजपा इस मुद्दे को दोबारा जिंदा करने की कोशिश में जुट गए हैं। वहीं दिल्ली की गद्दी पर बैठी आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर मंत्रियों तक को इंदिरा गांधी की मौत के बाद भड़के सिख दंगों पर सफाई देनी पड़ रही है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के निवर्तमान अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला ने भी इस पूरे मामले में सफाई देते हुए कहा कि 84 के दंगों में तत्कालीन सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। हबीबुल्ला ने राजीव गांधी की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की
गुजरात पर सवाल लेकिन 84 पर साफ
वजाहत हबीबुल्ला गुजरात दंगों में सरकार की भूमिका से इनकार तो नहीं करते, लेकिन उनका मानना है कि 1984 में सिख विरोधी दंगों में सरकार की भूमिका नहीं थी।
उस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत हबीबुल्ला ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के दौरान सरकार बुरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में हबीबुल्ला का कार्यकाल रविवार को ही समाप्त हुआ।
सरकार की कोई साजिश नहीं
उन्होंने सिख विरोधी दंगों को सरकार की बड़ी नाकामी तो माना, मगर इसके लिए सरकार की ओर से साजिश रचने की किसी भी तरह की संभावना को खारिज कर दिया।
हालांकि वर्ष 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगा मामले में हबीबुल्ला ने राज्य सरकार को क्लीन चिट नहीं दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर दंगाइयों को उकसाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं और वह खुद इन आरोपों को खारिज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पीएमओ पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया था।
इंदिरा की तैयारियों में जुटी थी सरकार
वजाहत ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया था। सभी लोग इंदिरा के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसलिए राजधानी में दंगा भड़कने की आशंका को कोई भांप नहीं पाया।
इसी का फायदा दंगाईयों ने उठाया और बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। जब तक हालातों पर पूरी तरह काबू पाया जाता तब तक बड़ी संख्या में सिखों के साथ ज्यादातियां हुईं।
राजीव गांधी की कोई भूमिका नहीं
उन्होंने इंदिरा की हत्या के तत्काल बाद प्रधानमंत्री बनाए गए राजीव की इन दंगों में भूमिका को भी सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि उस समय राजीव ने पहले तो अपनी मां के बारे में जानकारी ली, उसके बाद उन्होंने हिंसा पर काबू करने की कोशिशें शुरू कर दी थी।
उधर, हबीबुल्ला ने वर्ष 2002 में गुजरात दंगों पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि गुजरात की एक कैबिनेट मंत्री को दंगों में भूमिका के लिए मिली सजा से भी इसमें सरकार की भूमिका का शक बना रह जाता है।
वजाहत ने कहा कि यह सही है कि मोदी उस दौरान बैठकें कर रहे थे। मगर उन बैठकों में क्या चर्चा की गई, इसका आकलन किया जाना चाहिए।