मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापमं घोटाला मामले में सोमवार को एक महिला प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। व्यापमं परीक्षा के जरिए चयनित मृतका का शव एक तालाब से मिला है। इस मामले में लगातार हो रही मौतों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
खासतौर से व्यापमं घोटाले की रिपोर्टिंग करने गए एक पत्रकार की संदिग्ध मौत के बाद जिस तरह से इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ा है, उससे भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व असहज है।
हालांकि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुलकर शिवराज का बचाव किया लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि शिवराज के भविष्य का फैसला काफी हद तक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख और मृत पत्रकार की विसरा रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यदि आरोपों से घिरे प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव को हटाने का निर्देश दिया तो भाजपा के लिए शिवराज का बचाव करना कठिन होगा।
पार्टी नेतृत्व पर शिवराज को हटाने का बढ़ेगा दबाव
इसके अलावा विसरा रिपोर्ट में पत्रकार की मौत में साजिश का खुलासा हुआ तब भी पार्टी नेतृत्व पर शिवराज को मुख्यमंत्री पद से हटाने का दबाव बढ़ेगा।
फिलहाल पार्टी की नजर 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल को हटाने से संबंधित याचिका की सुनवाई और मृत पत्रकार की विसरा रिपोर्ट पर टिकी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को हटाने संबंधी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने भी एक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से व्यापमं मामले की जांच अपने नियंत्रण में लेने की अपील की है।
तो सीएम का बचाव करना पार्टी के लिए होगा कठिन
एक न्यूज चैनल के पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद व्यापमं घोटाले के राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने से भाजपा नेतृत्व बेहद असहज है। हालांकि पार्टी नेता शिवराज के पक्ष में लगातार तर्क दे रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इस मामले में हुई ज्यादातर मौतें संदिग्ध नहीं हैं।
करीब आधा दर्जन मौतें तो हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी के गठन से पहले हुई हैं और इतनी ही मौतें मध्य प्रदेश से बाहर हुई हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अब सारा कुछ सुप्रीम कोर्ट के भावी रुख और मृत पत्रकार की विसरा रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
खासतौर पर अगर कोर्ट ने राज्यपाल को हटाने का निर्देश दिया और विसरा रिपोर्ट में पत्रकार की मौत में साजिश की बात सामने आई तो शिवराज को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। साथ ही अगर कोर्ट ने जांच को अपनी निगरानी में लेने या सीबीआई के हवाले करने का आदेश दिया तब भी शिवराज की मुसीबत बढ़ेगी।
व्यापमं घोटाला मामले के तूल पकड़ने से भाजपा नेतृत्व असहज
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सोमवार को एक याचिकाकर्ता ने इस मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
नौ जुलाई को होने वाली सुनवाई में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की याचिका समेत पांच याचिकाओं पर सुनवाई हो सकती है। इन सभी याचिकाओं में एक बात जो समान है, वह है शीर्ष अदालत की निगरानी में व्यापमं घोटाले की जांच। साथ ही याचिकाओं में मामले की जांच सीबीआई से कराने की गुहार की गई है।
इनमें से एक याचिका में मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव को हटाने की भी अपील की गई है। वहीं एक याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा राज्यपाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने को भी चुनौती दी गई है।